"बिश्नोई" के अवतरणों में अंतर

154 बैट्स् जोड़े गए ,  6 माह पहले
सम्पादन सारांश रहित
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
 
==इतिहास==
सम्वत् 1542 तक गुरु जाम्भोजी की कीर्ति चारों और फेल गई थी और इसी साल राजस्थान में भयंकर अकाल पड़ा जिसमें जाम्भोजी महाराज ने अकाल पीडि़तों की अन्न व धन्न से भरपूर सहायता की। सम्वत् 1542 की कार्तिक बदी 8 को जांभोजी महाराज ने एक विराट यज्ञ का आयोजन सम्भराथल धोरे पर किया<ref name="Biśnoī1991">{{cite book|author=श्रीकृष्ण बिश्नोई|title=Biśnoī dharma-saṃskāra|url=https://books.google.com/books?id=VQMcAAAAIAAJ|year=1991|publisher=Dhoka Dhorā Prakāśana|page=36}}</ref> और 29 नियमों की दीक्षा एवं पाहल देकर बिश्नोई धर्म की स्थापना की। बिश्नोई पंथ में दीक्षित होने वाले अधिकांश व्यक्ति जाट थे।
 
==खेजड़ली बलिदान==
378

सम्पादन