"नरसिंह" के अवतरणों में अंतर

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{{redirect| भगवान श्री नृसिंह देव||}}
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[[चित्र:Narasimha Disemboweling Hiranyakashipu, Folio from a Bhagavata Purana (Ancient Stories of the Lord) LACMA M.82.42.8 (1 of 5).jpg|250px|right|[[प्रह्लाद|प्रहलाद]] एवं उसकी माता '''नरसिंहावतारनृसिंह अवतार''' को [[हिरण्यकशिपु|हिरण्यकश्यप]] के वध के समय नमन करते हुए]]
'''नरसिंह''' नर + सिंह ("मानव-सिंह") को [[पुराण|पुराणों]] में भगवान [[विष्णु]] का [[अवतार]] माना गया है।<ref>[http://srimadbhagavatam.com/1/3/18/en1 Bhag-P 1.3.18] "चौदहवें अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप का अवतार लेकर [[नास्तिक]] हिरण्यकश्यपु के शरीर को अपने नख से दो टुकड़ों में विभक्त कर दिया जैसे [[बढई]] किसी लकडी के दो टुकडों को चीरता है"</ref> जो आधे मानव एवं आधे [[सिंह]] के रूप में प्रकट होते हैं, जिनका सिर एवं धड तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे<ref>[http://srimadbhagavatam.com/7/8/19-22/en1 Bhag-P 7.8.19-22]</ref> वे [[भारत]] में, खासकर दक्षिण भारत में [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] संप्रदाय के लोगों द्वारा एक देवता के रूप में पूजे जाते हैं जो विपत्ति के समयसदैव अपने [[भक्त|भक्तों]] की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।<ref>स्टीवेन जे रोजेन, ''नरसिंह अवतार, द हाफ मैन/हाफ लायन इनकारनेशन'', पृ5</ref>
 
== पूजन विधि ==
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