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== जीवनी ==
सायण ने अपनी रचनाओं में अपने चरित्र के विषय में आवश्यक तथ्यों का निर्देश किया है। ये दक्षिण भारत के निवासी थे। इनके पिता का नाम था मायण और माता का श्रीमती। इनका गोत्र भारद्वाज था। कृष्ण [[यजुर्वेद]] की तैत्तिरीय शाखा के अनुयायी श्रोत्रिय थे। इनके अग्रज [[विजयनगर साम्राज्य]] के संस्थापक महाराज हरिहर के मुख्यमंत्री तथा आध्यात्मिक गुरु थे। उनका नाम था - [[माधवाचार्य]] जो अपने जीवन के अंतिम समय में [[शृंगेरीपीठ]] के विद्याचरणविद्यारण्य स्वामी (माधव विद्यारण्य) के नाम से अधिपतिजगद्गुरु शंकराचार्य हुए थे। सायण के अनुज का नाम था भोगनाथ जो संगमनरेश के नर्मसचिव तथा कमनीय कवि थे। सायण ने अपने अलंकार सुधानिधि नामक ग्रंथ में अपने तीन पुत्रों का नामोल्लेख किया है जिनमें कंपण संगीत शास्त्र में प्रवीण थे, मायण गद्य-पद्य रचना में विचक्षण कवि थे तथा शिंगण वेद की क्रमजटा आदि पाठों के मर्मज्ञ वैदिक थे।
 
=== सायण के आश्रयदाता ===
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