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चर्चिल सम्राज्यवादी सोच का शख्श था. वो भारत को कभी आजाद नही करने के पक्ष मे था. उसे भारतीयो से वैसी घृणा थी जैसे रसूखदार निम्मजातियो से करते हैा
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छो (चर्चिल सम्राज्यवादी सोच का शख्श था. वो भारत को कभी आजाद नही करने के पक्ष मे था. उसे भारतीयो से वैसी घृणा थी जैसे रसूखदार निम्मजातियो से करते हैा)
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== इन्हें भी देखें ==
* [[ब्लड, टॉय्ल, टीयर्ज़ ऐण्ड स्वॅट|लहू, मेहनत, आँसू और पसीना]] पसीना
*भारतीयो से घृणा
 
1942 में जब ये पता चला कि गांधी अनशन पर जाने वाले हैं तो चर्चिल की वार कैबिनेट ने तय किया कि गांधी को मरने दिया जाएगा. लेकिन लिनलिथगो को शक़ था कि इस मसले पर वॉयसराय काउंसिल के कुछ भारतीय सदस्य शायद इस्तीफ़ा दे सकते हैं. जब चर्चिल को ये पता चला तो उन्होंने वायसराय को लिखा, "अगर कुछ काले लोग इस्तीफ़ा दे भी दें तो इससे फ़र्क क्या पड़ता है. हम दुनिया को बता सकते हैं कि हम राज कर रहे हैं. अगर गांधी वास्तव में मर जाते हैं तो हमें एक बुरे आदमी और साम्राज्य के दुश्मन से छुटकारा मिल जाएगा. ऐसे समय जब सारी दुनिया में हमारी तूती बोल रही हो, एक छोटे बूढ़े आदमी के सामने जो हमेशा हमारा दुश्मन रहा हो, झुकना बुद्धिमानी नहीं है." जब गांधी का अनशन कुछ लंबा खिच गया तो चर्चिल ने वॉयसराय लिनलिथगो को पत्र लिखा, "मैंने सुना है कि गांधी अपने अनशन के ड्रामे के दौरान पानी के साथ ग्लूकोज़ ले रहे हैं. क्या इस बात की जाँच कराई जा सकती है? अगर इस जालसाज़ी का भंडा फूटता है तो ये हमारे लिए बेशक़ीमती होगा." मार्टिन गिलबर्ट अपनी किताब 'रोड टू विक्ट्री' में लिखते हैं कि लिनलिथगो ने बाकायदा इसकी जाँच करवाई और चर्चिल के आरोप ग़लत पाए गए.
 
        गांधी के अनशन से चर्चिल इतने चिढ़ गया कि उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के प्रधानमंत्री जनरल स्मट्स को पत्र लिखा, "मैं नहीं समझता कि गांधी के मरने की कोई इच्छा है. मेरा मानना है कि वो मुझसे बेहतर खाना खा रहे हैं." जब बंगाल के सूखे के दौरान लार्ड वेवल ने भारत को तुरंत अनाज भेजे जाने की मांग की तो चर्चिल इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने वेवल को एक तार भेजा कि "गांधी अब तक मरे क्यों नहीं हैं?" जब गांधी ने भारत की आज़ादी के आश्वासन के बदले ब्रिटेन के युद्ध प्रयासों में मदद की पेशकश की तो चर्चिल ने कहा, "वॉयसराय को इस देशद्रोही से बात नहीं करनी चाहिए और उसे दोबारा जेल में डाल देना चाहिए." वो शायद दुनिया में अकेला राष्ट्राध्यक्ष होंगा जिसने महात्मा गांधी के मरने की ख़वाहिश की थी.
 
सालों बाद चर्चिल ने स्वीकार किया कि उनके चुनाव हारने से सिर्फ़ एक अच्छी बात ये हुई कि भारत को आज़ादी देने का फ़ैसला जब हुआ तब वो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं थे. पाँच साल पहले जिस शख़्स ने सार्वजनिक रूप से ये ऐलान किया था कि हम अनिश्चित काल तक भारत पर राज करते रहेंगे, ये फ़ैसला लेना सबसे बड़ा अपमान होता. क्योकि भारत को लेकर चर्चिल का नज़रिया काफ़ी निराशात्मक था. उसकी नजर में भारतीय बेहूदे और गंवार थे. वे नहीं चाहता था कि भारत को आज़ादी प्रदान की जाए.
 
विंस्टन चर्चिल एक निर्लज्ज साम्राज्यवादी था, जो यह मानता था कि भारतीय जानवरो की तरह हैं और इनका धर्म भी जानवरो वाला हैा भारत कभी एक राष्ट्र नहीं बन सकता और भारतीयों को हमेशा अंग्रेजों का गुलाम रहना चाहिए। जहां तक हिटलर और नाजियों की बात है, तो चर्चिल एकदम सही था। लेकिन गांधी और भारत को लेकर वह पूरी तरह से गलत था। घर में तो वह राष्ट्रीय स्वतंत्रता का बचाव करते थे और विदेश में नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देते थे, यही विंस्टन चर्चिल की राजनीति का अंतर्विरोध था।  
 
 
== बाहरी कडीयाँ ==
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