"केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड" के अवतरणों में अंतर

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भारत में सबसे पहले "उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एण्ड इंटरमीडिएट एजुकेशन पहला बोर्ड" की स्थापना सन् १९२१ में हुई थी। [[राजपुताना]], मध्य भारत तथा ग्वालियर इसके अधिकार क्षेत्र में आते थे और संयुक्त प्रांतों की सरकार द्वारा किए गए अभ्यावेदन के उत्तर में तत्कालीन भारत सरकार ने सभी क्षेत्रों के लिए वर्ष १९२९ में एक संयुक्त बोर्ड स्थापित करने का सुझाव दिया जिसका नाम "बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एण्ड इंटरमीडिएट एजुकेशन राजपूताना" रखा गया। इसमें [[अजमेर]], [[मारवाड]], मध्य भारत और [[ग्वालियर]] शामिल थे।<ref name="आधिकारिक"/>
 
बोर्ड द्वारा माध्यमिक शिक्षा स्तर पर तीव्र विकास और विस्तार करने के फलस्वरूप इसके संस्थानों में शिक्षा के स्तर एवं गुणता में सुधार आया। परन्तु के विभिन्न भागों में राज्य विश्वविद्यालयों और राज्य बोर्डों के स्थापित हो जाने से केवल [[अजमेर]], [[भोपाल]] और तत्पश्चात्‌ विंय प्रदेश ही इसके अधिकार क्षेत्र में रह गए।<ref name="वर्ल्ड"/> इसके परिणामस्वरूप वर्ष १९५२ में बोर्ड का संविधान संशोधित किया गया जिससे इसका क्षेत्राधिकार भाग-ग और भाग-घ के क्षेत्रों तक बढ़ा दिया गया और बोर्ड को इसका वर्तमान नाम '''केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड''' दिया गया। अंततः १९६२ में बोर्ड का पुनर्गठन किया गया।<ref name="हिन्दुस्तान"/> इसका मुख्य उद्देश्य उन शैक्षिक संस्थानों की अधिक प्रभावी ढंग से सेवा करना था, उन छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी होना जिनके माता-पिता केंद्र सरकार में कार्यरत थे और जिनमें अक्सर स्थानांतरणीय नौकरियां थीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.paigamehind.com/|title=पैगाम-ए-हिंद|last=|first=|date=|website=पैगाम-ए-हिंद|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2020-05-19}}</ref>
 
== प्रमुख कार्यकलाप एवं उद्देश्य ==
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