"पुरूवास" के अवतरणों में अंतर

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भारतीयों के पास विदेशी को मार भगाने की हर नागरिक के हठ, शक्तिशाली गजसेना के अलावा कुछ अनदेखे हथियार भी थे जैसे सातफुटा भाला जिससे एक ही सैनिक कई-कई शत्रु सैनिकों और घोड़े सहित घुड़सवार सैनिकों भी मार गिरा सकता था। इस युद्ध में पहले दिन ही सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिली। [[सिकंदर|अलेक्जेंडर द ग्रेट]] की सेना के कई वीर सैनिक हताहत हुए। यवनी सरदारों के भयाक्रांत होने के बावजूद सिकंदर अपने हठ पर अड़ा रहा और अपनी विशिष्ट अंगरक्षक एवं अंत: प्रतिरक्षा टुकड़ी को लेकर वो बीच युद्ध क्षेत्र में घुस गया। कोई भी भारतीय सेनापति हाथियों पर होने के कारण उन तक कोई खतरा नहीं हो सकता था, राजा की तो बात बहुत दूर है। राजा पुरु के भाई अमर ने सिकंदर के घोड़े बुकिफाइलस (संस्कृत-भवकपाली) को अपने भाले से मार डाला और सिकंदर को जमीन पर गिरा दिया। ऐसा यूनानी सेना ने अपने सारे युद्धकाल में कभी होते हुए नहीं देखा था।
 
[[सिकंदर|अलेक्जेंडर द ग्रेट]] जमीन पर गिरा तो सामने राजा पुरु तलवार लिए सामने खड़ा था। [[सिकंदर|अलेक्जेंडर द ग्रेट]] बस पलभर का मेहमान था कि तभी राजा पुरु ठिठक गया। फिर भी सिकंदर ने पोरस पर बीजय पायी। पोरस को गिरफ्तार कर लिया। सिकंदर ने पुछा तुम्हरा क्या किया जाये? तोह पराक्रमी पोरस ने कहा की जो एक राजा दूसरे के साथ करे वो कर। इसे माफ कर छोड़ दिया गया।
 
==लोकप्रिय संस्कृति में==
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