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''''''विष्णु सखाराम खांडेकर''' ''' [[मराठी भाषा|मराठी]] साहित्यकार हैं। इन्हें [[१९७४|1974]] में [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया था।
इन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन [[१९६८]] में [[भारत सरकार]] ने [[पद्म भूषण]] से सम्मानित किया था। उन्होंने उपन्यासों और कहानियों के अलावा नाटक, निबंध और आलोचनात्मक निंबंध भी लिखे। खांडेकर के [[ललित निबंध]] उनकी भाषा शैली के कारण काफी पसंद किए जाते हैं। इनके द्वारा रचित एक [[उपन्यास]] ''[[ययाति ]]'' के लिये उन्हें सन् १९६० में [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[साहित्य अकादमी पुरस्कार मराठी|मराठी]]) से सम्मानित किया गया।<ref name="sahitya">{{cite web | url=http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp | title=अकादमी पुरस्कार | publisher=साहित्य अकादमी | accessdate=11 सितंबर 2016}}</ref>