"पुष्टिमार्ग" के अवतरणों में अंतर

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[[भक्ति]] के क्षेत्र में [[वल्लभाचार्य|महापुभुमहाप्रभु श्रीवल्‍लभाचार्य]] जी का साधन मार्ग '''पुष्टिमार्ग''' कहलाता है। पुष्टिमार्ग के अनुसार सेवा दो प्रकार से होती है - ''नाम-सेवा'' और ''स्‍वरूप-सेवा''। स्‍वरूप-सेवा भी तीन प्रकार की होती है -- तनुजा, वित्तजा और मानसी। मानसी सेवा के दो प्रकार होते हैं - मर्यादा-मार्गीय और पुष्टिमार्गीय। मर्यादा-मार्गीय मानसी-सेवा पद्धति का आचरण करने वाला साधक जहाँ अपनी ममता और अहं को देर करता है, वहाँ पुष्टि-मार्गीय मानसी-सेवा पद्धति वाला साधक अपने शुद्ध प्रेम के द्वारा श्रीकृष्‍ण भक्ति में लीन हो जाता है और उनके अनुग्रह से सहज में ही अपनी वांक्षित वस्‍तु प्राप्‍त कर लेता है।
 
==परिचय==
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