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चौपाल में विचार करने के लिए
(चौपाल में विचार करने के लिए)
==सोमदेव==
इस लेख में दो जगह वर्तनी की अशुद्धियाँ हैं - १. 'बिषादग्रस्त' के स्थान पर 'विषादग्रस्त' होना चाहिए. २. विराम चिन्ह में अशुद्धि है, पूर्णविराम के स्थान पर यहाँ अल्पविराम चाहिए. पर किसी "विद्वान्" संपादक @रोहित साव27 ने की गयी इन शुद्धियों को जल्दबाज़ी में अमान्य कर दिया है. संपादकों को यह निर्देश होना चाहिए कि किसी भी अन्य द्वारा किये गए संशोधनों को बिना पढ़े अमान्य नहीं किया जाना चाहिए. दुर्भाग्य से विकिपीडिया में ज़्यादातर संपादक विद्यार्थी लोग हैं, जो खुद हिंदी भाषा अभी सीख ही रहे हैं, इसलिए संस्कृत के या हिंदी के शब्दों के ज्ञान की उनसे अपेक्षा नहीं की जा सकती. पर इस स्थिति में उन्हें ऐसे संशोधन छोड़ देने चाहियें, बजाय उनको निरस्त/अमान्य करने के. [[सदस्य:कनाश|कनाश]] ([[सदस्य वार्ता:कनाश|वार्ता]]) 14:07, 28 मई 2020 (UTC)कनाश (वार्ता) 14:04, 28 मई 2020 (UTC)
 
==तथाकथित संपादकों की घातक प्रवृत्ति==
 
यह देखने में आरहा है कि बहुत से "संपादक" किसी भी नए संशोधन/परिवर्तन को जैसे आँख बंद करके तुरंत परावर्तित(रिवर्स) कर देते हैं, जब कि यह संशोधन केवल टंकण की त्रुटियाँ या वर्तनी की अशुद्धि को सही किया हुआ ही होता है. ऐसे कई संशोधन तो २ मिनट के भीतर ही अमान्य कर दिए जाते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि वास्तव में क्या संशोधन है, यह उन्होंने देखा ही नहीं. शायद उनको इसका फायदा यह होता है कि ऐसे 'विद्वान संपादक' के नाम तुरंत संशोधन की एक एंट्री दर्ज होजाती है. इस तरह बहुत कम समय में ५०० या १००० संशोधन कर लेने पर उन्हें कोई तमगा या सर्टिफिकेट मिलता है. इसी लालच में वे परोक्ष रूप से विकिपीडिया को हानि पहुंचाते हैं, क्योंकि जो त्रुटियाँ और स्पेलिंग की गलतियाँ वगैरह किसी ने सही की हुई होती हैं, वे ऐसे महानुभाव 'संपादक' की कृपा से बरकरार रहती हैं. जब तक विकिपीडिया प्रशासन या वरिष्ठ संपादक लोग इस मामले पर संज्ञान नहीं लेंगे, यह प्रवृत्ति निरंकुशता के साथ चलती रहेगी. बहुत से विद्यार्थी जो अभी खुद पढ़ ही रहे हैं और जिनका अच्छी हिंदी का ज्ञान संदिग्ध है, वे बड़े उत्साह से इस तरह का काम करके फटाफट प्रशंसा अर्जित करने की इच्छा रखते हैं. विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, पर कुछ हद तक उन पर नियंत्रण रखना और उनका मार्गदर्शन करना भी आवश्यक है. अगर संपादकों के गलत निर्णय को वापस बदल दिया जाता है तो यह उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन जाता है, उसके बाद अपनी गलती न मानते हुए वे उस गलत संशोधन को ही बरकरार रखते हैं. कुछ वर्षों पहले की और आज के संपादनों की गुणवत्ता की तुलना करने पर वास्तव में क्षोभ होता है. पर उम्मीद अभी बाक़ी है.
 
आशा है, चौपाल के पञ्च/सरपंच, प्रशासक, वरिष्ठ संपादक वगैरह इस पर खुले दिमाग से, बिना किसी के साथ द्वेष की भावना के साथ, इस पर विचार करेंगे.
सादर,
[[सदस्य:कनाश|कनाश]] ([[सदस्य वार्ता:कनाश|वार्ता]]) 08:21, 29 मई 2020 (UTC)
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