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#skmchmuzaffarpur {{ज्ञानसन्दूक महाभारत के पात्र|width1=|मुख्य शस्त्र=|width2=|देवनागरी=|संदर्भ ग्रंथ=[[महाभारत]], [[पुराण]] आदि|Caption=ऋषि वेदव्यास ([[महाभारत|जयसंहिता]])|उत्त्पति स्थल=यमुना तट [[हस्तिनापुर]]|व्यवसाय=[[वैदिक ऋषि]]|राजवंश=|नाम=कृष्णद्वैपायन वेदव्यास|माता और पिता=[[सत्यवती]] (मत्स्यगंधा) और ऋषि [[पराशर ऋषि|पराशर]]|भाई-बहन=[[भीष्म]],[[चित्रांगद]] और [[विचित्रवीर्य]] सौतेले भाई|जीवनसाथी=|अन्य नाम=कृष्णद्वैपायन, बादरायणि, पाराशर्य|संतान=[[शुकदेव]],
[[धृतराष्ट्र]], [[पांडु]] और [[विदुर]]|Image=Vyasa.jpg|काव्य कार्य=[[महाभारत]], [[श्रीमद्भगवद्गीता]], अष्टादश [[पुराण]]}}
 
समय आने पर [[सत्यवती]] गर्भ से वेद वेदांगों में पारंगत एक पुत्र हुआ। जन्म होते ही वह बालक बड़ा हो गया और अपनी माता से बोला, "माता! तू जब कभी भी विपत्ति में मुझे स्मरण करेगी, मैं उपस्थित हो जाउँगा।" इतना कह कर वे तपस्या करने के लिये द्वैपायन द्वीप चले गये। द्वैपायन द्वीप में तपस्या करने तथा उनके शरीर का रंग काला होने के कारण उन्हे कृष्ण द्वैपायन कहा जाने लगा। आगे चल कर वेदों का भाष्य करने के कारण वे वेदव्यास के नाम से विख्यात हुये।<ref>{{Cite web|url=http://jaimaamansadevi.com/jmd/8-%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88|title=8 पौराणिक पात्र, जिनको अमृत का वरदान मिला है :: ॐ Jai Mata Di ॐ|website=jaimaamansadevi.com|access-date=2020-01-08}}</ref>
 
== वेद व्यास के विद्वान शिष्य ==hello
 
* [[पैल]]