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उन्होंने जगद्गुरु कृपालु परिषद् के नाम से विख्यात एक वैश्विक हिन्दू संगठन का गठन किया था। जिसके इस समय 5 मुख्य आश्रम पूरे विश्व में स्थापित हैं। विदेशों में इनका मुख्य आध्यात्मिक केन्द्र (द हार्वर्ड प्लूरिश प्रोजेक्ट) [[यूएसए]] में है।<ref name="Walker, J.K 2007">Walker, J.K. 2007. ''The Concise Guide to Today's Religions and Spirituality''. [[Harvest House]] Publishers.</ref> इनमें से चार भारत में तथा एक (द हार्वर्ड प्लूरिश प्रोजेक्ट) [[अमरीका]] में है।<ref name="harvard">''[http://pluralism.org/files/affiliate/jain/RadhaMadhavDham.pdf Radha Madhav Dham]''The Harvard Plurism Project.</ref> जेकेपी राधा माधव धाम तो सम्पूर्ण पश्चिमी गोलार्द्ध, विशेषकर उत्तरी अमेरिका में सबसे विशाल हिन्दू मन्दिर है।<ref name="hua">''[http://hua.edu/media/mediasupportfiles/newsletters_brochures/HU-Newsletter-7-03.pdf Vedic Foundation Inaugurated at Barsana Dham, Austin]''. Retrieved 15 Dec 2011.</ref><ref name="ciment">Ciment, J. 2001. ''Encyclopedia of American Immigration''. Michigan: [[M. E. Sharpe|M.E. Sharpe]]</ref><ref name="HyltonandRosie" >Hylton, H. & Rosie, C. 2006. ''Insiders' Guide to Austin''. [[Globe Pequot Press]].</ref><ref name="texas-monthly">Mugno, M. & Rafferty, R.R. 1998. ''Texas Monthly Guidebook to Texas''. Gulf Pub. Co.</ref>
 
14 जनवरी 1957 को [[मकर संक्रांति]] के दिन महज़ 34 वर्ष की आयु में उन्हें काशी विद्वत् परिषद् की ओर से [[जगद्गुरु]] की उपाधि से विभूषित किया गया था।<ref name="singh" /><ref>काशी में [http://www.jagran.com/uttar-pradesh/mathura-15371222.html 1957 में जगद्गुरु] की उपाधि मिली थीथी।</ref> वे अपने प्रवचनों में समस्त वेदों, उपनिषदों, पुराणों, गीता, वेदांत सूत्रों आदि के खंड, अध्याय, आदि सहित संस्कृत मन्त्रों की संख्या क्रम तक बतलाते थे जो न केवल उनकी विलक्षण स्मरणशक्ति का द्योतक था, वरन् उनके द्वारा कण्ठस्थ सारे वेद, वेदांगों, ब्राह्मणों, आरण्यकों, श्रुतियों, स्मृतियों, विभिन्न ऋषियों और शंकराचार्य प्रभृति जद्गुरुओं द्वारा विरचित टीकाओं आदि पर उनके अधिकार और अद्भुत ज्ञान को भी दर्शाता था।
 
जगद्गुरु कृपालु महाराज का 15 नवम्बर 2013 (शुक्रवार) सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर [[गुड़गाँव]] के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया।<ref name="Maharajji Kripalu">{{cite web|url=http://www.jagran.com/news/national-kripalu-maharaj-is-no-more-10863471.html/|title=कृपालु महाराज का देहावसान|publishers=[[दैनिक जागरण]], जागरण संवाददाता, [[गुड़गाँव]]|accessdate=16 नवम्बर 2013}}</ref>
 
== संक्षिप्त परिचय ==
अपनी ननिहाल मनगढ़ में जन्मे राम कृपालु त्रिपाठी ने [[गाँव]] के ही मिडिल स्कूल से 7वीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिये महू [[मध्य प्रदेश]] चले गये। कालान्तर में आपने साहित्याचार्य, आयुर्वेदाचार्य एवं व्याकरण‌‌‍ाचार्यव्याकरणाचार्य की उपाधियाँ आश्चर्यजनक रूप से अल्पकाल में ही प्राप्त कर लीं ।लीं। अपने ननिहाल में ही पत्नी पद्मा के साथ गृहस्थ जीवन की शुरुआत की और राधा कृष्ण की भक्ति में तल्लीन हो गये। भक्ति-योग पर आधारित उनके प्रवचन सुनने भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँचने लगे। फिर तो उनकी ख्याति देश के अलावा विदेश तक जा पहुँची। उनके परिवार में दो बेटे घनश्याम व बालकृष्ण त्रिपाठी हैं। इसके अलावा तीन बेटियाँ भी हैं - विशाखा, श्यामा व कृष्णा त्रिपाठी। उन्होंने अपने दोनों बेटों की शादी कर दी जो इस समय दिल्ली में रहकर उनके ट्रस्ट का सारा कामकाज खुद सम्हालते हैं।हैं, जबकि उनकी तीनों बेटियों ने अपने पिता की राधा कृष्ण भक्ति को देखते हुए विवाह करने से मना कर दिया और कृपालु महाराज की सेवा में जुट गयीं।<ref name="जागरण">{{cite web|url=http://www.jagran.com/news/national-jagat-guru-kripalu-ji-maharaj-help-friends-10863517.html|title=दोस्तों के दोस्त थे जगत कृपालु जी महाराज|publishers=[[दैनिक जागरण]]|accessdate=16 नवम्बर 2013}}</ref>
 
== प्रेम मन्दिर की अवधारणा ==
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