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'''झेन''' ([[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] : '''Zen''') को ‘जेन’ भी कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ 'ध्यान' माना जाता है। इसकी शुरूआत महात्मा [[महाकाश्यप|महाकश्यप]] नेे की थी तथा यह [[महायान|बौद्ध धर्म]] का एक सम्प्रदाय है, जो [[जापान]] के [[सामुराई|सेमुराई]] वर्ग का [[धर्म]] है। सेमुराई समाज यौद्धाओं का समाज है। इसे दुनिया की सर्वाधिक बहादुर कौम माना जाता था।<ref>{{Cite web |url=https://tricycle.org/trikedaily/important-new-translation-complete-lotus-sutra/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 मार्च 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170326135731/https://tricycle.org/trikedaily/important-new-translation-complete-lotus-sutra/ |archive-date=26 मार्च 2017 |url-status=live }}</ref> झेन का विकास [[चीन]] में लगभग 500 ईस्वी में हुआ। चीन से यह 1200 ईस्वी में जापान में फैला। प्रारंभ में जापान में [[बौद्ध धर्म]] का कोई [[सम्प्रदाय|संप्रदाय]] नहीं था किंतु धीरे-धीरे वह बारह सम्प्रदायों में बँट गया जिसमें झेन भी एक था।
 
ऐसा माना जाता है कि सेमुराई वर्ग को अधिक आज्ञापालक तथा शूरवीर बनाने के लिए ही जेन संप्रदाय का सूत्रपात हुआ था। दरअसल झेन संप्रदाय [[शिन्तो धर्म|शिंतो]] और बौद्ध धर्म का समन्वय था। माना यह भी जाता है कि बौद्ध धर्म को जापान ने सैनिक रूप देने की चेष्ठा की थी, इसीलिए उन्होंने शिंतो धर्म के आज्ञापालक और देशभक्ति के सिद्धांत को भी इसमें शामिल कर सेमुराइयों को मजबूत किया। सेमुराई जापान का सैनिक वर्ग था। 1868 में उक्त सैनिकों के वर्ग का अंत हो गया।
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