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'''मर्सिया''' (फ़ारसी : مرثیه) [[हुसैन इब्न अली]] और करबला के उनके साथियों की शहादत और बहादुरी बताने के लिए लिखी गई एक लालित्य कविता है। मर्सिया अनिवार्य रूप से धार्मिक हैं। <ref name="lucknow19thc">[{{Cite web |url=http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urduhindilinks/bailey/004lucknow19thc.pdf |title=A History of Urdu literature by T. Grahame Bailey; ''Urdu Poetry in Lucknow in the 19th century''] |access-date=13 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171026032106/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urduhindilinks/bailey/004lucknow19thc.pdf |archive-date=26 अक्तूबर 2017 |url-status=live }}</ref> इन घटनाओं पर लिखे गए मर्सिया को शास्त्रीय मर्सिया कहा जाता है।
 
==पृष्ठभूमि==
मंगलिया शब्द अरबी शब्द मार्शिया (रूट आर-टीएच-वाई) से लिया गया है, जिसका मतलब है कि एक मृत आत्मा के लिए एक बड़ी त्रासदी या शोक। <ref name="umaamerica">{{cite web|url=http://www.umaamerica.net/magazine2005/magazine_poetry.asp |title=Poetry: Urdu Marsiya, Anees and his Poetry |accessdate=2010-10-15 |deadurl=bot: unknown |archiveurl=https://web.archive.org/web/20100822011919/http://www.umaamerica.net/magazine2005/magazine_poetry.asp |archivedate=August 22, 2010 |df= }}</ref>
 
इस साहित्त रूप को लखनऊ में विशेष रूप से अनुकूल वातावरण मिला, मुख्य रूप से क्योंकि यह दक्षिण एशिया के शिया मुस्लिम समुदायों के केंद्रों में से एक है, जिसने इसे क्रियाकलापों के लिए पवित्रता और धार्मिक कर्तव्य का कार्य माना जाता है और करबाला की लड़ाई के शहीदों को याद किया जाता है। इस कविता रूप को [[मीर बबर अली अनीस]] के लेखन से अपने चरम पर पहुंच गया। मर्सिया एक कविता है जो [[अहल अल-बैत]], इमाम हुसैन और करबाला की लड़ाई के शहीदों की बहादुरी और याद दिलाने के लिए लिखी गई है। यह आमतौर पर शोक की कविता है। <ref>[{{Cite web |url=http://akchagla.com/Masters%20of%20Marsiya.htm |title=The Masters of Marsiya – Anees and Dabeer] |access-date=13 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110116024858/http://akchagla.com/Masters%20of%20Marsiya.htm |archive-date=16 जनवरी 2011 |url-status=dead }}</ref>
 
उर्दू में प्रसिद्ध मर्सिया लेखकों [[मीर बबर अली अनीस]], [[मीर मूनि]]स, [[मिर्जा सलामत अली दबीर]], [[मीर ज़मीर]], [[अली हैदर तबातबाई]] हैं। नज्म आफंडी, मीर नाफेस, मीर रईस, मीर कदीम, मीर आरिफ, सैयद हुसैन ताशुक, मीर इश्क, मोदेदाब किस्मतवी अदब लखनवी मोहजब लखनवी सैयद सज़ाद हुसैन "छायांकित" मोहम्मद अस्कारी "ज़ैद" सादिक़ हुसैन "शहीद", सैयद करार हैदर, सैयद यदुल्ला हैदर, नवाब बाकर अली "रवि लखनवी", अल्लामा डॉ। सय्यद अली इमाम जैदी "गौहर लखनवी" (मीर बबर अली के महान पोते "अनीस" कबीर "सैयद अब्बास हैदर मुज़्तर जौनपुरी, तैयब काज़मी, इशरत लखनवी, सैयद मोहम्मद अली" मोससीर जौनपुरी" इत्यादी हैं
 
==आधुनिक काल==
इस साल 2013-2014 को माफस नोहा अकादमी (इंडिया) द्वारा " एज़ माडिना ता माडिना" शीर्षक के साथ जारी किया गया पहला विश्व मर्सिया ऑडियो 28 राजब के दौरान 8 रबील अवल, मीर अनिस के कलाम, मिर्जा दबेर के दौरान सभी प्रमुख कार्यक्रमों पर मर्सिया शामिल है, नसीम अमरोही, भारत के सय्यद रहीिल अब्बास रिज़वी द्वारा सुनाई गई। <ref>Old Marsiya reciters still reciting marsiya before majlis, and young generation also attract towards soul of marsiya and soazkhwani in India, Pakistan, and other western countries[http://nadeem-sarwar.com/rahil-rizvi-2014/36-marsiya-28-rajab-to-8-rabiul-awwal-by-rahil-rizvi.html worlds first bunch of 36 marsiya collection based on events] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131203001228/http://nadeem-sarwar.com/rahil-rizvi-2014/36-marsiya-28-rajab-to-8-rabiul-awwal-by-rahil-rizvi.html |date=3 दिसंबर 2013 }} by Mafss Noha Academy - India, Recited by Sayyed Rahil Abbas Rizvi (India)</ref>
 
==यह भी देखें==
1,14,810

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