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''यह पृष्ठ कुशीनगर नामक स्थान के बारे में है जो एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। भारतीय इतिहास में कुशीनगर का महत्वपूर्व स्थान है साथ ही इस स्थान का प्राचीन नाम कुशावती है। इसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के ज्येष्ठ पुत्र कुश ने बसाया था। परिनिर्वाण स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। प्रशासनिक जनपद के लिये देखें '''[[कुशीनगर जिला]]'''''
 
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'''कुशीनगर''' एवं '''कसया बाजार''' [[उत्तर प्रदेश]] के उत्तरी-पूर्वी सीमान्त इलाके में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। वर्तमान में यह [[कुशीनगर जिला|कुशीनगर जिले]] के अन्तर्गत आता है। "कसया बाजार" नाम कुशीनगर में बदल गया है और उसके बाद "कसया बाजार" आधिकारिक तौर पर "कुशीनगर" नाम के साथ नगर पालिका बन गया है। कुशीनगर का इतिहास काफी समृद्ध एवं गौरवशाली रहा है।
त्रेतायुग में भगवान राम के दो पुत्र लव और कुश थे, जिसमे कुश के द्वारा ही इस प्राचीन नगरी कुशावती को बसाया गया था। [[वाल्मीकि रामायण]] में कुश के द्वारा कुशावती नगर के निर्माण का वर्णन मिलता है। आज वर्तमान में उन्ही कुश के वंशज [[कुशवाहा]] [[कच्छवाह]] नाम से प्रसिद्ध है।
 
यह [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] [[तीर्थस्थान|तीर्थस्थल]] है जहाँ [[गौतम बुद्ध]] का [[महापरिनिर्वाण]] हुआ था। कुशीनगर, [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] पर [[गोरखपुर]] से लगभग ५० किमी पूरब एवं बुुद्ध मंदिर नेचुआ जलालपुर गोपालगंज बिहार से पश्चिम में स्थित है। यहाँ कई देशोंं के अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिर हैं। इस कारण से यह एक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है जहाँ विश्व भर के बौद्ध तीर्थयात्री भ्रमण के लिये आते हैं। कुशीनगर कस्बे के और पूरब बढ़ने पर लगभग २० किमी बाद [[बिहार]] राज्य आरम्भ हो जाता है।
 
यहाँ बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बुद्ध इण्टरमडिएट कालेज, प्रबुद्ध सोसाइटी ,भिक्षु संघ , प्रबुद्ध एक्युप्रेशर सेन्टर, चन्दमणि निशुल्कनिःशुल्क पाठशाला, महर्षि अरविन्द विद्या मंदिर तथा कई छोटे-छोटे विद्यालय भी हैं। कुशीनगर के आस-पास का क्षेत्र मुख्यत:मुख्यतः कृषि-प्रधान है। जन-सामन्य की बोली [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] है। यहाँ [[गेहूँ]], [[धान]], [[गन्ना]] आदि मुख्य फसलें पैदा होतीं हैं।
 
[[बुद्ध पूर्णिमा]] के अवसर पर कुशीनगर में एक माह का [[मेला]] लगता है। यद्यपि यह तीर्थ [[महात्मा बुद्ध]] से सम्बन्धित है, किन्तु आस-पास का क्षेत्र [[हिन्दू]] बहुल है। इस मेले में आस-पास की जनता पूर्ण श्रद्धा से भाग लेती है और विभिन्न मन्दिरों में पूजा-अर्चना एवं दर्शन करती है। किसी को संदेह नहीं कि बुद्ध उनके 'भगवान' हैं।
इस प्राचीन स्थान को प्रकाश में लाने के श्रेय [[अलेक्ज़ैंडर कन्निघम|जनरल ए कनिंघम]] और ए. सी. एल. कार्लाइल को जाता है जिन्होंनें 1861 में इस स्थान की खुदाई करवाई। खुदाई में छठी शताब्दी की बनी भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा मिली थी। इसके अलावा रामाभार स्तूप और और माथाकुंवर मंदिर भी खोजे गए थे। 1904 से 1912 के बीच इस स्थान के प्राचीन महत्व को सुनिश्चित करने के लिए [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण|भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण]] विभाग ने अनेक स्थानों पर खुदाई करवाई। प्राचीन काल के अनेक मंदिरों और मठों को यहां देखा जा सकता है।
 
कुशीनगर के करीब [[फाजिल नगर|फाजिलनगर]] कस्बा है जहां के 'छठियांव' नामक गांव में किसी ने महात्मा बुद्ध को [[सूअर]] का कच्चा गोस्तमांस खिला दिया था जिसके कारण उन्हें दस्त की बीमारी शुरू हुई और मल्लों की राजधानी कुशीनगर तक जाते-जाते वे निर्वाण को प्राप्त हुए। फाजिलनगर में आज भी कई टीले हैं जहां [[दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय|गोरखपुर विश्वविद्यालय]] के प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से कुछ खुदाई का काम कराया गया है और अनेक प्राचीन वस्तुएं प्राप्त हुई हैं। फाजिलनगर के पास ग्राम जोगिया जनूबी पट्टी में भी एक अति प्राचीन मंदिर के अवशेष हैं जहां बुद्ध की अतिप्रचीन मूर्ति खंडित अवस्था में पड़ी है। गांव वाले इस मूर्ति को 'जोगीर बाबा' कहते हैं। संभवत: जोगीर बाबा के नाम पर इस गांव का नाम जोगिया पड़ा है। जोगिया गांव के कुछ जुझारू लोग `लोकरंग सांस्कृतिक समिति´ के नाम से जोगीर बाबा के स्थान के पास प्रतिवर्ष मई माह में `लोकरंग´ कार्यक्रम आयोजित करते हैं जिसमें देश के महत्वपूर्ण साहित्यकार एवं सैकड़ों लोक कलाकार सम्मिलित होते हैं।
 
कुशीनगर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में मल्लों का एक और गणराज्य [[चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान|पावा]] था। यहाँ बौद्ध धर्म के समानांतर ही [[जैन धर्म]] का प्रभाव था। माना जाता है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर [[महावीर|महावीर स्वामी]] ( जो बुद्ध के समकालीन थे) ने पावानगर (वर्तमान में [[फाजिल नगर|फाजिलनगर]] ) में ही परिनिर्वाण प्राप्त किया था। इन दो धर्मों के अलावा प्राचीन काल से ही यह स्थल हिंदू धर्मावलंम्बियों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। गुप्तकाल के तमाम भग्नावशेष आज भी जिले में बिखरे पड़े हैं। लगभग डेढ़ दर्जन प्राचीन टीले हैं जिसे पुरातात्विक महत्व का मानते हुए पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा है। उत्तर भारत का इकलौता [[सूर्य मंदिर]] भी इसी जिले के [[तुर्कपट्टी]] में स्थित है। भगवान [[सूर्य]] की प्रतिमा यहां खुदाई के दौरान ही मिली थी जो गुप्तकालीन मानी जाती है। इसके अलावा भी जनपद के विभिन्न हिस्सों में अक्सर ही जमीन के नीचे से पुरातन निर्माण व अन्य अवशेष मिलते ही रहते हैं।
 
==मैत्रेय-बुद्ध परियोजना==
संसार की विशालतम प्रतिमा- 'मैत्रेय बुद्ध' का निर्माण भारत (कुशीनगर, उत्तर प्रदेश) में ही किया जा रहा है। मैत्रेय परियोजना के तहत इस पर त्वरित गति से काम हो रहा है। इस परियोजना को सभी बौद्ध राष्ट्रों का सहयोग प्राप्त है और [[दलाई लामा]] का संरक्षकत्व भी। यह मूर्ति पांच सौ फूटफुट ऊंची होगी। जिस मंच पर बुद्ध आसीन होंगे उसके अन्दर चार हजार लोगों के साथ बैठ कर ध्यान करने की व्यवस्था होगी। प्रतिमा की शैली तिब्बती है। वेशभूषा भी तिब्बती है। बुद्ध के बैठने के मुद्रा ऐसी होगी जैसे कि वे सिंहासन पर बैठे हों और उठ कर चल देने को तत्पर हों। तिब्बती बौद्ध मान्यता है कि मैत्रेय बुद्ध सुखावती लोक में ठीक इसी मुद्रा में बैठे हैं और किसी भी पल वे पृथ्वी की ओर चल देंगे। इस प्रतिमा में इसी धारणा का शिल्पांकन होगा।
 
== प्रमुख आकर्षण ==
 
===अन्य===
कुशीनगर के [[पनियहवा]] में [[गण्डकी नदी|गंडक नदी]] पर बना पुल देखने में काफी रोचक लगता है। [[पडरौना]] का बहुत पुराना राज दरबार भी पर्यटकों का दिल लुभाता है। कुशीनगर का सबसे बड़ा गांव जंगल खिरकिया में भव्य मंदिर है जहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। ग्राम जंगल अमवा के समीप मुसहर टोली में बना पंचवटी पार्क भी देखने योग्य हैं।
 
इस जिले में शिक्षा का स्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। बहुत सारे कालेज व शैक्षिण संस्थान हैं। जिनमें बुद्ध डिग्री कॉलेज, उदित नारायण कॉलेज, किसान इंटर कॉलेज प्रमुख हैं। इस जिला में कठकुईयां चीनी मील, रामकोला चीनी मील, पडरौना चीनी मल, खड्डा चीनी मील समेत कई बड़े चीनी मील हैं। इस जिले में [[पडरौना]], [[रामकोला]], [[कठकुईयां]], [[खड्डा]], [[दुदही]], [[तमकुही रोड]], [[पनियहवा]] समेत कई छोटे बड़े रेलवे स्टेशन हैं। कुशीनगर जिला का मुख्यालय रवीन्द्र नगर धूस है। वर्तमान में कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम प्रगति पर है
* [[कुशीनगर जिला]]
* [[कसया (तहसील), कुशीनगर]]
* [[पडरौना]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==