"घंसौर" के अवतरणों में अंतर

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== इतिहास ==
जनश्रुति के अनुसार घंसौर का सबसे प्राचीन बसाहट पुरानी बस्ती है। पहले यहां जंगल हुआ करता था। स्वर्गीय वैद्य श्री मोहनलाल दुबे जी के अनुसार "यहां जंगल में 3 अहीर (गोपालक) अपने पशुओं को लेकर आए थे। इनमेंयह 2तीनों अपने पशुओं को लेकर डाढ़ाई नाला के समीप चराते और पानी आदि पिलाते थे किसी समय शेर नेको कालांतरभनक मेंलगने के कारण उसने धीरे-धीरे इन पशुओं पर आक्रमण करना आरंभ किया और उनकी रक्षा करते समय इनमें से दो की मृत्यु हो गई और उन्हें शेर ने खा गया।लिया। भय के कारण शेष 1एक अहीरगोपालक ने यहांकुछ खेरोदूर कीआगे बसाहटवृक्षों को साफ करके यहां बरगद वृक्ष के नीचे खुदाई करके एक पत्थर की प्रतिमा प्राप्त करके स्थापित की और उसकी पूजा प्रार्थना करके कुछ भूमि का रक्षाबंधन करके खेरो की बसाहट आरंभ की। बादकालांतर में उसी के परिचित गोपालक यहां आए और अपना स्थान बनाया एवं कृषि करके रहने लगे।" इसके दक्षिण भाग में आकर बसे लोगों ने इसी बसाहट को "बस्ती" नाम से पुकारना आरंभ कर दिया। इसका नामकरण कब किसने कैसे किया, यह रहस्य अभी अज्ञात है। स्वर्गीय पण्डित श्री शिव प्रसाद शास्त्री के अनुसार "संभवत: श्रीनर्मदा जी की परिक्रमा करने वाले किसी विद्वान् तीर्थयात्री अथवा साधु सन्यासी द्वारा इसका नामकरण किया गया होगा। संस्कृत व्याकरण के अनुसार इसका शुद्ध स्वरूप "घुणसौर" हो सकता है जिसमें तत्सम-तद्भव के आधार पर "ण" के स्थान पर "न" और "न" के स्थान पर "न्" तथा "सौ" के स्थान पर "सो" उच्चरित होता है। इससे धीरे धीरे लोग घुणसौर-घणसौर-घनसौर-घन्सौर-घंसौर-घंसोर कहने लिखने लगे।" सम्प्रति विकिपीडिया में इसका नामार्थ "छोटा स्वर्ग" उल्लिखित है।
 
== भौगोलिक स्थिति ==
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