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यीशु मसीह की जीवन
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[[चित्र:Christ Pantocrator, Church of the Holy Sepulchre.png|thumb|एक मोजेक]]
 
'''यीशु''' या '''यीशु मसीह'''<ref name="name">ईसा, यीशु और मसीह नाम हेतु पूरी चर्चा इस लेख के वार्ता पृष्ठ पर है। प्रचलित मान्यता के विरुद्ध, ईसा एक इस्लामी शब्दावली है, व "यीशु" सही ईसाई शब्दावली है। तथा मसीह एक उपादि है। विस्तृत चर्चा वार्ता पृष्ठ पर देखें।</ref> (इब्रानी :'''''येशुआ'''''; अन्य नाम:'''ईसा मसीह''', '''जीसस क्राइस्ट'''), जिन्हें ''नासरत का यीशु'' भी कहा जाता है, [[ईसाई धर्म]] के प्रवर्तक हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/magazine-46337283|title=क्या ईसा मसीह के वजूद के ऐतिहासिक सबूत मौजूद हैं?|access-date=4 दिसंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181204113530/https://www.bbc.com/hindi/magazine-46337283|archive-date=4 दिसंबर 2018|url-status=live}}</ref> ईसाई लोग उन्हें परमपिता परमेश्वर का पुत्र और ईसाई [[त्रित्व|त्रिएक परमेश्वर]] का तृतीय सदस्य मानते हैं। ईसायीशु मसीह की [https://www.ratanroy.com/post/परम-श-वर-मन-ष-य-बनकर-इस-प-थ-व-पर-ल-ग-क-स-थ-रहन-आए-थ जीवनी] को औरदेखेे।और उपदेश [[बाइबिल]] के [[नया नियम|नये नियम]] (ख़ास तौर पर चार शुभसन्देशों: मत्ती, लूका, युहन्ना, मर्कुस पौलुस का पत्रिया, पत्रस का चिट्ठियां, याकूब का चिट्ठियां, दुनिया के अंत में होने वाले चीजों का विवरण देने वाली प्रकाशित वाक्य) में दिये गये हैं।
यीशु मसीह को इस्लाम में [[ईसा इब्न मरियम|ईसा]] कहा जाता है, और उन्हें इस्लाम के भी महानतम पैग़म्बरों में से एक माना जाता है। उन्हें इस्लामी परम्परा में भी एक महत्वपूर्ण पैग़म्बर माना गया है, तथा [[क़ुरआन|क़ुरान]] में उनका ज़िक्र है।
 
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