"हिरनगाँव" के अवतरणों में अंतर

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यह जरौली खुर्द ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आता है ग्राम हिरनगाँव की कुलदेवी का नाम माता बेलोन (नरोरा) है घनी वसाबट वाली वस्ती से दूर बसे होने तथा खुले एवम् शांतिपूर्ण स्वछ हरियाली युक्त वातावरण व् ट्रैफिक की समस्या से दूर होने के कारण ब्राह्मणों का गाँव कहे जाने वाले इस गाँव में पूर्व में कायस्थ भी रहा करते थे परंतु वर्तमान में कोई भी कायस्थ नहीं रहते अनेक समुदाय के लोग निवास करते है इनमे ब्राहम्ण, जाटव, नाई, कोरी, काछी, वाल्मीकि है '''ब्राह्म्णों में तिवारी, स्रोतीय, मुदगल, पाठक, जोशी, तेनुगुरिया, दीक्षित गौत्र के व्यक्ति है''' हिरनगाँव चार मौहल्लो में विभाजित है जिसमे "तिवारी मौहल्ला, स्रोतीय मौहल्ला, दीक्षित मौहल्ला, एवम जाटव मोहल्ला "सभी समुदाय के व्यक्ति मिलजुल कर घनिस्ट प्रेमता के साथ रहते है। फ़िरोज़ाबाद जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर पूर्वी दिशा में स्थित है। यहाँ पर अधिकांश व्यक्ति सरकारी सेवा में कार्यरत थे परंतु वर्तमान में अधिकांश व्यक्ति कारख़ानों/फैक्ट्रीयो पर निर्भर है। वर्तमान में जो व्यक्ति सरकारी सेवा में कार्यरत है वो गाँव से बाहर शहर में निवास कर रहे हैं।हिरनगाँव का पिन कोड 283103 है यहाँ पत्रो के आने जाने हेतु भारत सरकार द्वारा स्थापित [[हिरनगाँव डाकखाना]] भी है एवम् प्रधान डाकखाना [[फ़िरोज़ाबाद]] में स्थित है। जो कि लगभग 8 किलो मीटर दूरी पर है।
 
'''आगरा गजेटियर सन 1905 के अनुसार-''' फिरोजाबाद मैं दो दिन बाजार लगता था रविवार एवं बृहस्पतिवार को जिन जिन ग्राम वासियों को कोई भी शहर से सामान खरीदना होता था तब वह इन निर्धारित दिनों में ग्राम के कई लोग मिलजुल कर पैदल अपने ग्राम से शहर जाते थे  और अपने लिए  आवश्यकता के सामान  खरीद कर  लेकर आते थे हिरनगाँव ग्राम के ग्रामवासी मेला देखने के लिए अपने निकटतम, ग्राम अलीनगर केंजरा, उलाऊ, जरौली कलां में मेला देखने जाते थे उस समय ग्राम उलाऊ के मेले में लगभग 250  व्यक्तियों की भीड़ आती थी व ग्राम अलीनगर केंजरा में लगभग 300 व्यक्तियों की मेले में भीड़ लगती थी एवं जरौली कलां ग्राम के मेले में लगभग 400 व्यक्तियों की भीड़ लगती थी
 
हिरनगाँव के चारों तरफ देवी देवताओं के मंदिर बने हुए हैं जो कि इस गांव की विपत्तियों से रक्षा करने में कवच का काम करते हैं मंदिरों के बने हुए इस कवच को भेदना किसी भी आसुरी शक्ति के बस में नहीं है इस गांव में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति कादाका संस्कारदासंस्कार उसको बैठा कर किया जाता है योग क्रिया की तरह जबकि अन्य गांव में इस तरह की प्रथा नहीं है अन्य गांव में किसी भी मृत व्यक्ति का दाह संस्कार लिटाकर किया जाता है इस प्रथा को इस गांव हिरनगाँव के व्यक्ति पूर्वज ऋषि मुनि की योगसाधना से जोड़ते हैं क्योंकि प्राचीन काल में ऋषि मुनि अपनी योग साधना ऋषि मुद्रा में लीन होकर करते थे हिरनगांव ग्राम वासियों के कुल के पंडा पंडित राजेश कुमार सम्राट पुत्र स्व0 गिरिराज धरण सम्राट निवासी मोहल्ला अंदर दहलान सोरों जिला कासगंज उत्तर प्रदेश है
 
हिरनगाँव के उत्तर मे [[नारखी]] तहसील, दक्षिण में [[फ़तेहाबाद]], पश्चिम में [[टूण्डला]] तहसील और पूर्व में [[शिकोहाबाद]] तहसील है।[[आगरा मंडल]] 42 किलो मीटर दूरी पर है जिसमे कई मुगलकालीन ऐतहासिक इमारते सुशोभित है
 
==इतिहास==
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