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==== विवरण ====
'''हाउबेर/हाऊबेर''' या '''हपुषा'''(Juniper) एक [[कोणधारी]] [[वृक्ष]] है जिसकी ५० से ६७ [[जाति (जीवविज्ञान)|जीववैज्ञानिक जातियाँ]] हैं जो [[पृथ्वी]] के [[उत्तरी गोलार्ध]] पर विस्तृत हैं।<ref>Hampe, Hampe; Petit, Re´my J. (2010). "[http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1111/j.1469-8137.2009.03108.x/pdf Cryptic forest refugia on the ‘Roof of the World’] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160630234101/http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1111/j.1469-8137.2009.03108.x/pdf |date=30 जून 2016 }}". New Phytologist 185 (1): 5–7. doi:10.1111/j.1469-8137.2009.03108.x. Retrieved 2 September 2015.</ref> यह [[कूप्रेसाएसिए]] [[कुल (जीवविज्ञान)|जीववैज्ञानिक कुल]] में आते हैं, जिसका सबसे प्रसिद्ध वृक्ष-प्रकार [[सरो]] है। हपुषा [[आयुर्वेद]] और अन्य पारम्परिक चिकित्सा प्रणालियों में बहुत महत्वपूर्ण है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=upI55jwytpQC&pg=PA102 https://books.google.com/books?id=upI55jwytpQC&pg=PA102 The Encyclopedia of Vitamins, Minerals, and Supplements] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140709022020/http://books.google.com/books?id=upI55jwytpQC |date=9 जुलाई 2014 }}," Tova Navarra, Infobase Publishing, 2014, ISBN 9781438121031, ''... juniper (hapusha) ... in Chinese herbal medicine to treat bleeding and coughs ... In Ayurvedic medicine, juniper berries of various species ... used as a diuretic, diaphoretic, carminative and analgesic ...''</ref>
 
हि०-हाऊबेर, आरार, हाऊबैर। ब०-हवुषा। म०-होश। मा०-हाऊबोर। पं०-हाऊबेर, पेत्थरी, अबहुल। कुमा०-चिचिया। काश्मी०-वेंथा, पेथरा। फा०-तुख्मदुलह, ओरसा। अं०-Juniper berry (ज्युनिपेर बेरी)। ले०-Juniperus communis (ज्युनिपेरस कम्युनिस)। Cupressaceae (क्यूप्रेसॅसी)।
 
हाऊबेर दो प्रकार का होता है। एक का संस्कृत नाम 'हपुषा' और दूसरे का 'अश्वत्थफला' है। हपुषा और अश्वत्थफला वास्तव में दोनों फल और गंधभेद से दो द्रव्य हैं, परंतु दोनों के गुण समान है और दोनों ही के वृक्ष भी समान ही होते हैं। हपुषा-मछली से समान आकृति का एवं आम गंध युक्त और अश्वत्थफल-मछली के समान गंध और पीपर (अश्वत्थ) वृक्ष के फलों के समान फलवाला होता है। हपुषा वृक्ष हिमालय के पश्रिमोत्तर भाग में कुमाऊ से पश्रिम की ओर १२,५०० से १४,०००० फीट तक की ऊंचाई तक देखने में आते हैं।
 
इसका वृक्ष बडा नहीं होता बल्की इसका झाड होता है जो सघन, फैला हुआ, तथा बारहो मास हरा भरा रहता है। पत्ते-रेखाकार, नोकीले, ५ से १३ मि. मी. लंबे, एक साथ तीन-तीन एवं काण्ड से समकोण बनाते हुए होते हैं। फूल-पीत वर्ण के गुच्छों में आते हैं। फल-१/३-१/४ इंच के घेरे में गूलाकार, गूदेदार और पकने पर नीलापन युक्त काले या कुछ बैंगनी रंग के दिखाई पडते हैं। इनके ऊपर रजावरण रहता है। अग्र भाग पर शस्कपत्र के त्रिविभक्त निशान रहते हैं और आधार पर भी शल्क पत्र के दो चक्र रहते है। प्रत्येक फल में तीन-तीन बीज रहते हैं जिनके पृष्ठ पर तेलग्रन्थियां पाई जाती हैं। फलों से तेल निकाला जाता है। कुछ लोग ले०-टॅमॅरिक्स ग़ॅलिका (Tamarix gallica), हि०-झाऊ तथा फ्लूजिया ल्यूकोपाइरस् (flueggea leucopyrus willd) को ग्रहण करते हैं जो उचित नहीं है।
 
==== रासायनिक संगठन ====
इसमें एक उडनशील तेल ०.२५%, राल १०%, मधुशर्करा ३३%, एक तिक्त पदार्थ ज्यूनिपेरिन (juniperin), आक्सेलिक एसिड तथा कुछ आर्गेनिक अम्ल (Organic acid) आदि पदार्थ रह्ते हैं। इसी की एक अन्य जाति ज्यू. मॅक्रोपोडा (J. macropoda Boiss) के फल कुछ लम्बे रहते हैं तथा उसमें तेल की मात्रा ३.२४% पाई गई है।
 
==== गुण और प्रयोग ====
हाऊबेर सुगंधित, मूत्रजनक, वातानुलोमक, आध्यमानहर, पाचक, उत्तेजक, वृष्य, रक्तरकंदक, आर्तवजनक एवं उपसर्गनाशक है। इसका उपयोग उदर रोग, यकृत प्लीहा के विकार, आमवात, संधिशोध, श्वास, जीर्ण श्वसनिकाशोध, मुखपाक, अर्धावमेदक, नया तथा पुराना सोजाक, श्वेतप्रदर, कष्टार्तव, अनार्तव, मधुमेह तथा चर्मरोग में किया जाता है।
 
== इन्हें भी देखें ==
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