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१७ अप्रैल १९९९ को [[जयललिता]] की पार्टी आइएदमक ने सरकार से अपना समर्थन है दिया, और नए चुनावों की घोषणा करनी पड़ी।<ref>{{cite news | url = http://news.bbc.co.uk/2/hi/special_report/1998/india_elections/61761.stm | title = Atal Bihari Vajpayee: India's new prime minister | accessdate = 3 मार्च 1998 | publisher = बीबीसी न्यूज़ | date = 3 March 1998 | archive-url = https://web.archive.org/web/20161205150717/http://news.bbc.co.uk/2/hi/special_report/1998/india_elections/61761.stm | archive-date = 5 दिसंबर 2016 | url-status = live }}</ref><ref>{{cite news | url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/322065.stm | title=South Asia Vajpayee's thirteen months | accessdate=17 अप्रैल 1999 | publisher=बीबीसी न्यूज़ | date=17 April 1999 | archive-url=https://web.archive.org/web/20161130192857/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/322065.stm | archive-date=30 नवंबर 2016 | url-status=live }}</ref> तथा अटल सरकार को चुनाव तक, सामायिक शासन के स्तर पर घटा दिया गया। इस बीच, [[कारगिल]] में [[पाकिस्तानी]] घुसपैठ की खबर आई, और अटलजी की सरकार ने सैन्य कार्रवाई के आदेश दे दिए। यह कार्रवाई सफल रही और करीब २ महीनों के भीतर, भारतीय सऐना ने पाकिस्तान पर विजय प्राप्त कर ली। १९९९ के चुनाव में [[भाजपा]] के नेतृत्व की [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]] ने बहुमत प्राप्त की, और प्रधानमन्त्री [[अटल बिहारी वाजपेयी]] अपनी कुर्सी पर बरकरार रहे। अटल ने आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया को बरक़रार रखा और उनके शासनकाल में भारत ने अभूतपूर्व आर्थिक विकास दर प्राप्त किया। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी सहूलियतों के विकास के लिए सरकार ने कई निर्णायक कदम उठाए, जिनमें, [[राजमार्ग|राजमार्गों]] और सडकों के विकास के लिए [[राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना]] और [[प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना]] जैसी योजनाएँ शामिल हैं।<ref name="news.in.msn.com">{{cite web |url=http://news.in.msn.com/National/independenceday09/article.aspx?cp-documentid=3131559&page=4 |title=Vajpayee, the right man in the wrong party – ,Vajpayee, the right man in the wrong party – 4 – ,4 – National News – News – MSN India |publisher=MSN |accessdate=24 नवंबर 2012 |archive-url=https://archive.is/20130104050819/http://news.in.msn.com/National/independenceday09/article.aspx?cp-documentid=3131559&page=4 |archive-date=4 जनवरी 2013 |url-status=dead }} {{en icon}}</ref><ref>{{cite news|last=Mahapatra|first=Dhananjay|title=NDA regime constructed 50% of national highways laid in last 30 years: Centre|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-07-02/india/40328372_1_national-highways-state-highways-total-road-network|accessdate=26 नवम्बर 2013|newspaper=द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया|date=2 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131202231111/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-07-02/india/40328372_1_national-highways-state-highways-total-road-network|archive-date=2 दिसंबर 2013|url-status=live}} {{en icon}}</ref> परंतु, उनके शासनकाल के दौरान, वर्ष २००२ में, [[गुजरात]] में [[गोधरा कांड]] के बाद भड़के [[2002 की गुजरात हिंसा|हिन्दू-मुस्लिम दंगों]] ने विशेष कर [[गुजरात]] एवं देश के अन्य कई हिस्सों में, स्वतंत्रता-पश्चात् [[भारत]] के सबसे हिंसक और दर्दनाक सामुदायिक दंगों को भड़का दिया। सरकार पर और गुजरटी के तत्कालीन [[मुख्यमंत्री]] , [[नरेंद्र मोदी]], पर उस समय, दंगो के दौरान रोक-थाम के उचित कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया गया था। प्रधानमन्त्री [[अटल बिहारी वाजपेयी|वाजपेयी]] का कार्यकाल मई २००४ को समाप्त हुआ। वे देश के पहले ऐसे ग़ैर-[[कांग्रेस|कांग्रेसी]] प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने अपना पूरे पाँच वर्षों का कार्यकाल पूर्ण किया था। २००४ के चुनाव में [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]], लोकसभा में बहुमत प्राप्त करने में अक्षम रहा, और [[कांग्रेस]] सदन में सबसे बड़ी दल बन कर उबरी। वामपंथी पार्टियों और कुछ अन्य दलों के समर्थन के साथ, [[कांग्रेस]] के नेतृत्व में [[यूपीए]](संयुक्त विकासवादी गठबंधन) की सरकार स्थापित हुई, और [[प्रधानमन्त्री]] बने, [[मनमोहन सिंह]]। वे देश के पहले [[सिख]] प्रधानमन्त्री थे। उन्होंने, दो पूर्ण कार्यकालों तक इस पद पर अपनी सेवा दी थी। उनके कार्यकाल में, देश ने [[अटल बिहारी वाजपेयी|प्रधानमन्त्री वाजपेयी]] के समय हासिल की गए आर्थिक गति को बरक़रार रखा।<ref>{{cite web |url=https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html#Econ |title=CIA – वर्ल्ड फॅक्टबूक |publisher=Cia.gov |accessdate=15 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html#Econ |archive-date=11 जून 2008 |url-status=live }} {{en icon}}</ref><ref name="astaire">{{cite web|url=http://www.ukibc.com/ukindia2/files/India60.pdf |title= द इण्डिया रिपोर्ट |publisher=ऍस्टेयर रिपोर्ट |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20090114195859/http://www.ukibc.com/ukindia2/files/India60.pdf |archivedate=14 जनवरी 2009 }} {{en icon}}</ref> इसके अलावा, सरकार ने [[आधार]](विशिष्ट पहचान पत्र), और [[सूचना का अधिकार अधिनियम, २००५|सूचना अधिकार]] जैसी सुविधाएँ पारित की। इसके अलावा, [[मनमोहन सिंह]] के कार्यकाल में अनेक सामरिक और सुरक्षा-संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा। २६ नवंबर २००८ को [[मुम्बई]] पर हुए [[२००८ के मुंबई हमले|आतंकवादी हमले]] के बाद, देश में कई सुरक्षा सुधर कार्यान्वित किये गए। उनके पहले कार्यकाल के अंत में अमेरिकाके के साथ, नागरिक परमाणु समझौते के मुद्दे पर, लेफ़्ट फ्रंट के समर्थन वापसी से सरकार लगभग गिरने के कागार पर पहुँच चुकी थी, परंतु सरकार बहुमत सिद्ध करने में सक्षम रही। २००९ के चुनाव में कांग्रेस, और भी मज़बूत जनादेश के साथ, सदन में आई, और प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह प्रधानमन्त्री के आसान पर विद्यमान रहे।<ref>[http://www.pmindia.gov.in/hi/former_pm/डॉ-मनमोहन-सिंह/ डॉ-मनमोहन-सिंह की संक्षिप्त जीवनी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190714054824/https://www.pmindia.gov.in/hi/former_pm/%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/ |date=14 जुलाई 2019 }}, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट</ref> प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह का दूसरा कार्यकाल, अनेक उच्चस्तरीय घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही। साथ ही आर्थिक उदारीकरण के बाद आई प्रशंसनीय आर्थिक गति भी सुस्त पद गयी, और अनेक महत्वपूर्ण परिस्थितियों में ठोस व निर्णायक कदम न उठा पाने के कारण सरकार सरकार की छवि काफी ख़राब हुई थी। प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह का कार्यकाल, २०१४ में समाप्त हो गया।<ref>{{cite news|title=India's Manmohan Singh to step down as PM|url=http://www.theguardian.com/world/2014/jan/03/india-manmohan-singh-rahul-gandhi-narendra-modi|accessdate=20 April 2015|publisher=द गार्डियन|date=३ जनवरी २०१४|archive-url=https://web.archive.org/web/20150427111604/http://www.theguardian.com/world/2014/jan/03/india-manmohan-singh-rahul-gandhi-narendra-modi|archive-date=27 अप्रैल 2015|url-status=live}} {{en icon}}</ref> २०१४ के चुनाव में [[भारतीय जनता पार्टी]], जिसने भ्रस्टाचार और आर्थिक विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था, ने अभूतपूर्व बहुमत प्राप्त किया, और [[नरेंद्र मोदी]] को प्रधानमन्त्री नियुक्त किया गया। वे पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमन्त्री हैं, जोकि पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर विद्यमान हुए हैं। साथ ही वे पहले ऐसे प्रधानमन्त्री हैं, जोकि आज़ाद भारत में जन्मे हैं।<ref>[http://www.pmindia.gov.in/hi/अपने-प्रधान-मंत्री-को-जान-2/ प्रधानमन्त्री मोदी के बारे में...] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190810042953/https://www.pmindia.gov.in/hi/%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-2/ |date=10 अगस्त 2019 }}, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट</ref>
[https://www.sayhindi.in/2020/07/pm-list-india.html नरेंद्र मोदी] ने अपने प्रारंभिक वर्ष में योजना आयोग को निरस्त कर नीति आयोग का गठन किया। इनके ही कार्यकाल में उन्होंने उज्जवला योजना का शुभारंभ किया गया, तीन तलाक बिल, नोटबंदी आदि कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। अपने दूसरे कार्यकाल में इन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दी जो आज तक का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसला रहा।
 
== कालक्रम ==