"कोकम सिद्धांत" के अवतरणों में अंतर

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''{{हहेच लेख|कारण=मूल शोध।}}'कोकम''' ([[अंग्रेजी]]: KOKAM) [[भारत]] के [[गुजरात]] में सन् १९९० के आसपास [[जनता दल]] के मुखिया [[चिमनभाई पटेल]] द्वारा बनाया गया एक सामाजिक संगठन था जिसका [[सौराष्ट्र]] मे बहुत ज्यादा प्रभाव था जो [[कांग्रेस]] के [[खाम]] सिद्धांत को देखते हुए बनाया गया था।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=p5BuAAAAMAAJ|title=Political Development in Gujarat|last=Sheth|first=Pravin N.|date=1998|publisher=Karnavati Publications|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://ahmedabadmirror.indiatimes.com/columns/the-informer/Infrastructure-of-power-politics/articleshow/37437097.cms|title='˜Infrastructure' of power politics|last=Jul 2|first=Updated:|last2=2009|website=Ahmedabad Mirror|language=en|access-date=2020-07-22|last3=Ist|first3=02:50}}</ref> कोकम का अर्थ 'को से [[कोली]], क से [[कुणबी|कणबी]] और म से मुस्लिम' था। यह सिद्धांत कोली, कनवी और मुस्लिमों की वोट पाने के लिए अपनाया गया था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=pKYsAAAAIAAJ|title=India on the Threshold of the 21st Century: Problems of National Consolidation|date=1990|publisher="Social Science Today" Editorial Board, Nauka Publishers|isbn=978-5-02-023554-0|language=en}}</ref> कोकम में सबसे ज्यादा महत्व कोली जाति को दिया गया था जिसके चलते जनता दल ने सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात मे कांग्रेस की [[खाम]] नीति को कमजोर करते हुए काफी कोली अपनी तरफ़ कर लिए थे एवं कुछ [[पाटीदार]] भी जनता दल और [[भारतीय जनता पार्टी]] की तरफ़ चले गए।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=MBouAQAAIAAJ|title=Civil & Military Law Journal|date=2001|publisher=The Journal|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=v3-2AAAAIAAJ|title=Punjab Journal of Politics|date=1990|publisher=Department of Political Science, Guru Nanak Dev University|language=en}}</ref>
==संदर्भ==
[[श्रेणी:कोली]]
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