"अलाउद्दीन खिलजी" के अवतरणों में अंतर

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काल्पनिक बताया है।<ref>{{cite web|url=https://scroll.in/article/854706/ala-ud-din-khalji-why-the-peoples-king-was-made-out-to-be-a-monster-by-16th-century-chroniclers|title=Ala-ud-din Khalji: Why the ‘people’s king’ was made out to be a monster by 16th century chroniclers|access-date=29 अक्तूबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20190125102203/https://scroll.in/article/854706/ala-ud-din-khalji-why-the-peoples-king-was-made-out-to-be-a-monster-by-16th-century-chroniclers|archive-date=25 जनवरी 2019|url-status=live}}</ref>
 
उसके समय में उत्तर पूर्व से [[मंगोल]] आक्रमण भी हुए। उसने उसका भी डटकर सामना किया।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/entertainment-42062092|title='पद्मावती में असल अन्याय ख़िलजी के साथ हुआ है'|access-date=21 नवंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171124010949/http://www.bbc.com/hindi/entertainment-42062092|archive-date=24 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref> अलाउद्दीन ख़िलजी के बचपन का नाम अली 'गुरशास्प' था। खिलजी हिन्दुओ का दमन करने वाला बर्बर व्यक्ति था।जलालुद्दीनजलालुद्दीन खिलजी के तख्त पर बैठने के बाद उसे 'अमीर-ए-तुजुक' का पद मिला। मलिक छज्जू के विद्रोह को दबाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण जलालुद्दीन ने उसे कड़ा-मनिकपुर की सूबेदारी सौंप दी। भिलसा, चंदेरी एवं देवगिरि के सफल अभियानों से प्राप्त अपार धन ने उसकी स्थिति और मज़बूत कर दी। इस प्रकार उत्कर्ष पर पहुँचे अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा जलालुद्दीन की हत्या धोखे से 22 अक्टूबर 1296 को खुद से गले मिलते समय अपने दो सैनिकों (मुहम्मद सलीम तथा इख़्तियारुद्दीन हूद) द्वारा करवा दी। इस प्रकार उसने अपने सगे चाचा जो उसे अपने औलाद की भांति प्रेम करता था के साथ विश्वासघात कर खुद को सुल्तान घोषित कर दिया और दिल्ली में स्थित बलबन के लालमहल में अपना राज्याभिषेक 22 अक्टूबर 1296 को सम्पन्न करवाया।
 
== निर्माण कार्य ==