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राष्ट्रपिता [[महात्मा गांधी]] का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था। संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक मत्वपूर्ण योगदान होता है।
 
अतः गांधीजी का शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष योगदान रहा है। उनका मूलमंत्र था - 'शोषण-विहीन समाज की स्थापना करना'। उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए। क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ समाज का निर्माण असंभव है। अतः गांधीजी ने जो [https://www.neweducator.in/2020/08/Shiksha-Ka-Uddeshya.html शिक्षा के उद्देश्यों] एवं सिद्धांतों की व्याख्या की तथा प्रारंभिक शिक्षा योजना उनके शिक्षादर्शन का मूर्त रूप है। अतएव उनका [[शिक्षा दर्शन|शिक्षादर्शन]] उनको एक [[शिक्षाशास्त्री]] के रूप में भी समाज के सामने प्रस्तुत करता है। उनका [[शिक्षा]] के प्रति जो योगदान था वह अद्वितीय था।
उनका मानना था कि मेरे प्रिय भारतराष्ट्रपिता [[महात्मा गांधी]] का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था। संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक मत्वपूर्ण योगदान होता है।
 
== शिक्षादर्शन के उद्देश्य ==
 
गांधीजी ने [https://www.neweducator.in/2020/08/Shiksha-Ka-Uddeshya.html शिक्षा के उद्देश्यों] को दो भागों में विभाजित किया है।
 
(1) शिक्षा का तात्कालिक उद्देश्य
 
(2)तात्कालिक सर्वोच्च उद्देश्य-ये ऐसेतात्कालिक उद्देश्य हैं जिनकों नियमित शिक्षा के माध्यम से शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है। जो कि इस प्रकार है-
(२) सर्वोच्च उद्देश्य
 
(१)तात्कालिक उद्देश्य-ये ऐसे उद्देश्य हैं जिनकों नियमित शिक्षा के माध्यम से शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है। जो कि इस प्रकार है-
 
(1) '''जीविकोपार्जन का उद्देश्य''': गांधीजी के अनुसार शिक्षा ऐसी हो जो आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके बालक आत्मनिर्भर बन सके तथा बेरोजगारी से मुक्त हो।
 
(5) '''मुक्ति का उद्देश्य''': गांधीजी का आदर्श ‘‘सा विधा या विमुक्तये’’ अर्थात शिक्षा ही हमें समस्त बंधनों से मुक्ति दिलाती है। अतः गांधीजी शिक्षा के द्वारा आत्मविकास के लिये आध्यात्मिक स्वतंत्रता देना चाहते थे।
(२) सर्वोच्च [https://www.neweducator.in/2020/08/Shiksha-Ka-Uddeshya.html उद्देश्य]- शिक्षा के सर्वोच्च उद्देश्य के अंतर्गत वे सत्य अथवा ईश्वर की प्राप्ति पर बल देते थे। अतः मनुष्य का अंतिम एवं सर्वोच्च उद्देश्य आत्मानुभूति करना है।
 
(२) सर्वोच्च [https://www.neweducator.in/2020/08/Shiksha-Ka-Uddeshya.html उद्देश्य]- शिक्षा के सर्वोच्च उद्देश्य के अंतर्गत वे सत्य अथवा ईश्वर की प्राप्ति पर बल देते थे। अतः मनुष्य का अंतिम एवं सर्वोच्च उद्देश्य आत्मानुभूति करना है।
 
== गांधीजी की बेसिक अथवा बुनियादी शिक्षा ==