Vikash Varnval

Vikash Varnval 13 अगस्त 2020 से सदस्य हैं
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विकास वरनवाल Vikash Varnval एक कवि हैं, मूलरूप से रसड़ा बलिया उत्तर प्रदेश के निवासी हैं जोकि साल 2009 से दिल्ली मे रहते हैं l
 
विकास विभिन्न राज्यों के साहित्यिक मंचों, टीवी शो और न्यूज चैनल पर कविता पाठ कर चुके हैं l कवि सम्मेलन और मुशायरे मे इनके शेर खूब पसंद किए जाते हैं l
 
 
"जिन्दगी ऐसे ही जीता रहा तो एक दिन मर जाऊंगा
 
शहर के चमकीले कोठरी में नहीं रहना घर जाऊंगा
 
माँ के हाथों से खाऊँगा सोने से पहले पांव दबाऊंगा
 
शोहरत मिलजाएगी पहले ममता की छाँव कमाउंगा l"
 
-विकास वरनवाल Vikash Varnval
 
 
"ये जो मेरा दिल है, उनके हुस्न के मयखाने में बसा है l
 
शराब छोड़ दूंगा उनकी आँखों के तहखाने में नशा है l
 
ये लाली ये काजल ये बिंदिया और ये गाल पे तिल l
 
अरे हाँ! उसी लंबे कद वाली ने चुराया था मेरा दिल l"
 
-विकास वरनवाल Vikash Varnval
 
 
विकास अपने कला के माध्यम से लोगों को जागरूक और इंटरटेन करने के लिए भी जाने जाते हैं और भोजपुरी के उत्थान के लिए भी कार्य कर रहे हैं l
 
विकास पोएटिक आत्मा एनजीओ के ब्रांड अंबेसडर हैं एवं पुर्वइया पोएट्री के इवेंट्स लीड करते हैं l
 
 
सोशल वर्क में परास्नातक विकास एक मल्टीनेशनल कंपनी में मानव संसाधन विश्लेषण एवं सीएसआर (सोशल वर्क) के लिए कार्यरत हैं l विकास इंटरनेशनल NGO मे मेंटर भी हैं l