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;==स्रोत==
* मल्हार (तुकोजी का पुत्र) विषयक घटनाओं के आधार-
* ‘इतिहासाचीं साधनें’ में, पत्र क्र. 260, ता. 8-12-1789
* तुकोजी का पत्र अहिल्याबाई को क्र. 168, ता. 3-2-1790
* रुक्माबाई का पत्र अहिल्याबाई को, क्र. 268, ता. 3-2-1790
* अहिल्याबाई का पत्र तुकोजी को, क्र. 273, ता. 1-4-1790 [जिसमें उन्होंने मल्हार के अत्याचारों का वर्णन किया है।]
रुक्मबाई* यशवंतराव गंगाधर का पत्र अहिल्याबाई को, क्र. 277, ता. 162-4-1790
[जिसमें उन्होंने मल्हार के अत्याचारों का वर्णन किया है।]
यशवंतराव* गंगाधररुक्मबाई का पत्र अहिल्याबाई को, क्र. 277, ता. 216-4-1790
* मल्हार का पत्र अहिल्याबाई को, क्र. 279, ता. 5-5-1790 तथा पत्र क्र. 295, 301, 303, 315, 317, 332, 339, 347, 391, 399, 402, 403 इत्यादि और सरदेसाई की ‘New History of the Marathas’, Vol.।।। का सातवाँ और आठवाँ परिच्छेद; जहाँ नाना फडनीस का महादजी सिंधिया के प्रति वैर और मल्हार इत्यादि के चरित्रों का पूरा वर्णन है। मल्हार कहाँ और कैसे पकड़ा गया, इसका वर्णन यशवंतराव गंगाधर के पत्र में मिलेगा; जो होलकर सरकार पुस्तकमाला की 16वीं पुस्तक के पृ. 158-159 पर छपा है। पत्र मराठी में है।
रुक्मबाई का पत्र अहिल्याबाई को, क्र. 277, ता. 16-4-1790
मल्हार का पत्र अहिल्याबाई को, क्र. 279, ता. 5-5-1790 तथा पत्र क्र. 295, 301, 303, 315, 317, 332, 339, 347, 391, 399, 402, 403 इत्यादि और सरदेसाई की ‘New History of the Marathas’, Vol.।।। का सातवाँ और आठवाँ परिच्छेद; जहाँ नाना फडनीस का महादजी सिंधिया के प्रति वैर और मल्हार इत्यादि के चरित्रों का पूरा वर्णन है। मल्हार कहाँ और कैसे पकड़ा गया, इसका वर्णन यशवंतराव गंगाधर के पत्र में मिलेगा; जो होलकर सरकार पुस्तकमाला की 16वीं पुस्तक के पृ. 158-159 पर छपा है। पत्र मराठी में है।
 
* लखेरी का युद्ध 1-6-1793 के दिन हुआ था। दूसरे दिन भोर, मल्हार एक तालाब किनारे शराब पिए अचेत पड़ा पाया गया।-सरदेसाई की ‘New History of the Marathas’, Vol. lll, P.248।
* अहिल्याबाई का न्याय, शासन-व्यवस्था, दानशीलता और उनकी विनयशीलता इत्यादि का आधार है-‘इतिहासाचीं साधनें’, पहला भाग के पत्र। ‘महेश्वर दरबारचीं वातमीं पत्रें’; इंदौर गजीटियर; ‘होलकर शाहीचा इतिहास’; V.V. Thakur कृत ‘Life and Life-work of Shri Ahilya Bai’; डॉक्टर उदयभानु कृत ‘देवी अहिल्याबाई’, (हिंदी); ‘देवी श्री अहिल्याबाई होलकर’ (मराठी), ‘पुण्यश्लोक देवी श्री अहिल्याबाई’ (मराठी), ‘होलकरांची कैफियक’; सरदेसाई कृत ‘New History of the Marathas’, Vol.।।। और ‘The Main currents of Maratha History’। अंतिम पुस्तक में रुढ़िगत विश्वासों की आलोचना भी मिलेगी।
 
* गौतमापुर में अपराधियों को छोड़ छुट्टी- इंदौर गजीटियर, पृ. 275
* गनपतराव और जामघाट पर भवन-निर्माण गजीटियर, पृ. 285 मराठी पुस्तक ‘देवी श्री अहिल्याबाई होलकर’ इत्यादि।
इंदौर गजीटियर, पृ. 275
* उस समय के अंधविश्वास और खरगोन के चबूतरे, खंबे और फरसे की पूजा, ‘नव दुर्गामाता’ के मंदिर में जीभ का बलिदान, राजा बल्लाल की ‘ऊन’ वाली कहानी इत्यादि-
गनपतराव और जामघाट पर भवन-निर्माण गजीटियर, पृ. 285 मराठी पुस्तक ‘देवी श्री अहिल्याबाई होलकर’ इत्यादि।
* इंदौर गजीटियर, पृ. 275इत्यादि
उस समय के अंधविश्वास और खरगोन के चबूतरे, खंबे और फरसे की पूजा, ‘नव दुर्गामाता’ के मंदिर में जीभ का बलिदान, राजा बल्लाल की ‘ऊन’ वाली कहानी इत्यादि-
* अहिल्याबाई, तुकोजीराव होलकर-
इंदौर गजीटियर इत्यादि
* ऊपर लिखी सभी पुस्तकों में वृत्तांत मिलेगा।
अहिल्याबाई, तुकोजीराव होलकर-
* अहिल्याबाई और महादजी सिंधिया तथा उत्तरी क्षेत्र के प्रसंग-‘New History of the Marathas’, Vol.।।।; इसी पुस्तक के पृ. 213 पर अहिल्याबाई का क्षुब्ध होना और महादजी को शाप देना लिखा है।</ref>
ऊपर लिखी सभी पुस्तकों में वृत्तांत मिलेगा।
अहिल्याबाई और महादजी सिंधिया तथा उत्तरी क्षेत्र के प्रसंग-‘New History of the Marathas’, Vol.।।।; इसी पुस्तक के पृ. 213 पर अहिल्याबाई का क्षुब्ध होना और महादजी को शाप देना लिखा है।</ref>
 
== इन्हें भी देखें ==