"जलसेना विद्रोह (मुम्बई)" के अवतरणों में अंतर

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नौसेना विद्रोह ने कांग्रेस और लीग के वर्ग चरित्र को एकदम उजागर कर दिया। नौसेना विद्रोह और उसके समर्थन में उठ खड़ी हुई जनता की भर्त्सना करने में लीग और कांग्रेस के नेता बढ़-चढ़कर लगे रहे, लेकिन सत्ता की बर्बर दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने चूँ तक नहीं की। जनता के विद्रोह की स्थिति में वे साम्राज्यवाद के साथ खड़े होने को तैयार थे और स्वातन्त्रयोत्तर भारत में साम्राज्यवादी हितों की रक्षा के लिए वे तैयार थे। जनान्दोलनों की जरूरत उन्हें बस [[साम्राज्यवाद]] पर दबाव बनाने के लिए और समझौते की टेबल पर बेहतर शर्तें हासिल करने के लिए थी।
 
== विद्रोह का प्रभाव ==
1967 में स्वतंत्रता की 20 वीं वर्षगांठ पर एक संगोष्ठी चर्चा के दौरान; यह उस समय के ब्रिटिश उच्चायुक्त जॉन फ्रीमैन ने कहा कि 1946 के विद्रोह ने 1857 के भारतीय विद्रोह की तर्ज पर दूसरे बड़े पैमाने के विद्रोह की आशंका को बढ़ा दिया था। ब्रिटिश को डर था कि अगर 2.5 मिलियन भारतीय सैनिक जिन्होंने विश्व युद्ध में भाग लिया था, विद्रोह करते हैं तो ब्रिटिश में से कोई नहीं बचेगा और उन्हें अंतिम व्यक्ति कतक मार दिया जाएगा"।<ref>{{cite news |last= Aiyar|first= Swaminathan S Anklesaria|date=15 August 2007|title=Swaminathan S Anklesaria Aiyar: Freedom, won by himsa or ahimsa?|url=https://economictimes.indiatimes.com/swaminathan-s-a-aiyar/swaminathan-s-anklesaria-aiyar-freedom-won-by-himsa-or-ahimsa/articleshow/2282209.cms|newspaper=Economic Times}}</ref><ref>{{cite news |last= Doctor|first= Vikram|date=15 August 2007|title=In the 70th year of Independence, here is a look back at the long forgotten 1946 RIN Mutiny in Mumbai|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/in-the-70th-year-of-independence-here-is-a-look-back-at-the-long-forgotten-1946-rin-mutiny-in-mumbai/articleshow/57967250.cms|newspaper=Economic Times}}</ref>
 
== इन्हें भी देखें ==
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