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व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे।
नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नम:।।<ref>{{Cite web|url=https://sanskrit.today/shloka-vishnu-6/|title=Shloka - Vishnu 6|date=2017-05-03|website=Sanskrit.Today|language=en-US|access-date=2020-01-08|archive-url=https://web.archive.org/web/20170504062518/http://sanskrit.today/shloka-vishnu-6/|archive-date=4 मई 2017|url-status=livedead}}</ref>
 
 
[[File:Angkor Wat 006.JPG|thumb| व्यास जी गणेश सें महाभारत लिखवाते हुए, [[अंकोरवाट मंदिर]]।]]
 
पौराणिक-महाकाव्य युग की महान विभूति, महाभारत, अट्ठारह पुराण, श्रीमद्भागवत, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा जैसे अद्वितीय साहित्य-दर्शन के प्रणेता वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग ३००० ई. पूर्व में हुआ था। वेदांत दर्शन, अद्वैतवाद के संस्थापक वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। पत्नी आरुणी से उत्पन्न इनके पुत्र थे महान बाल योगी शुकदेव। श्रीमद्भागवत गीता विश्व के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' का ही अंश है। रामनगर के किले में और व्यास नगर में वेदव्यास का मंदिर है जहॉ माघ में प्रत्येक सोमवार मेला लगता है। गुरु पूर्णिमा का प्रसिद्ध पर्व व्यास जी की जयन्ती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://ignca.nic.in/coilnet/kbhu_v14.htm|title=Varanasi - Kashi Ki Vibhutiyna - Maharshi Vedvyas|website=ignca.nic.in|access-date=2020-01-08|archive-url=https://web.archive.org/web/20171214073907/http://www.ignca.nic.in/coilnet/kbhu_v14.htm|archive-date=14 दिसंबर 2017|url-status=livedead}}</ref>
 
पुराणों तथा महाभारत के रचयिता महर्षि का मन्दिर व्यासपुरी में विद्यमान है जो काशी से पाँच मील की दूरी पर स्थित है। महाराज काशी नरेश के रामनगर दुर्ग में भी पश्चिम भाग में व्यासेश्वर की मूर्ति विराजमान् है जिसे साधारण जनता छोटा वेदव्यास के नाम से जानती है। वास्तव में वेदव्यास की यह सब से प्राचीन मूर्ति है। व्यासजी द्वारा काशी को शाप देने के कारण विश्वेश्वर ने व्यासजी को काशी से निष्कासित कर दिया था। तब व्यासजी लोलार्क मंदिर के आग्नेय कोण में गंगाजी के पूर्वी तट पर स्थित हुए।<ref name=":0" />
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