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[https://www.fitnessayurveda.online/2020/06/Home-remedies-of-piles.html '''बवासीर''' या '''पाइल्स'''] या (Hemorrhoid / पाइल्स या मूलव्याधि) एक ख़तरनाक बीमारी है। बवासीर के2 प्रकार (की typesहोती ofहै। Hemmorhoids)आम भाषा में इसको खूनी और बादी बवासीर के नाम से जाना जाता है। कहीं पर इसे महेशी के नाम से जाना जाता है।
 
'''1- खूनी बवासीर''' :- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती है केवल खून आता है। पहले पखाने में लगके, फिर टपक के, फिर पिचकारी की तरह से सिर्फ खून आने लगता है। इसके अन्दर मस्सा होता है। जो कि अन्दर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है। टट्टी के बाद अपने से अन्दर चला जाता है। पुराना होने पर बाहर आने पर हाथ से दबाने पर ही अन्दर जाता है। आखिरी स्टेज में हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाता है।
1-[https://www.fitnessayurveda.online/2020/06/Home-remedies-of-piles.html अंदरूनी बवासीर (internal Hemmorhoids])
 
खूनी'''2-बादी बवासीर''' यहां:- सभीबादी प्रकारबवासीर केरहने बवासीरपर मेंपेट सबसेखराब जटिलरहता है। [[कब्ज]] बना रहता है। गैस बनती है। बवासीर काकी प्रकारवजह मानासे जातापेट है।क्योंकिबराबर इसमेंखराब रक्तरहता स्रावहै। होता हैकि तथापेट रक्तगड़बड़ स्रावकी होनेवजह से व्यक्तिबवासीर कमजोरहोती होहै। जाताइसमें हैतथाजलन, ऐसादर्द, होनेखुजली, सेशरीर व्यक्तिमें बहुतबेचैनी, तकलीफकाम में मन न लगना इत्यादि। टट्टी कड़ी होने पर इसमें खून भीजातासकता है। अगरइसमें मलमस्सा त्यागअन्दर केहोता समयहै। खूनमस्सा आएअन्दर तोहोने यहकी वजह से पखाने का एकरास्ता गंभीरछोटा समस्यापड़ता है तथाऔर विशेषज्ञचुनन सेफट सलाहजाती लेनेहै कीऔर जरूरतवहाँ है।जाताघाव हो जाता है उसे डाक्टर अपनी भाषा में फिशर भी कहते हें। जिससे असहाय जलन और पीड़ा होती है। बवासीर बहुत पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है। जिसे अँग्रेजी में फिस्टुला कहते हें। फिस्टुला प्रकार का होता है। भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है। और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है। कुछ दिन बाद इसी रास्ते से पखाना भी आने लगता है। बवासीर, भगन्दर की आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है। जिसको रिक्टम कैंसर कहते हें। जो कि जानलेवा साबित होता है।
जैसा कि हमें इस के नाम से ही पता चल रहा है कि यहां गुदा के अंदर होने वाली बवासीर है यह बहुत ज्यादा नुकसान या तकलीफ नहीं देती है अगर खान पान में प्रयोग किया जाए तो यह समय के साथ ठीक हो जाती है।
 
2- बाह्म बवासीर (external Hemmorhoids)
 
यहां बवासीर गुदा के बाहरी हिस्से में पनपते हैं ।तथा यह वही स्थान पर होते हैं जहां से मल त्याग किया जाता है।समय के साथ-साथ इस में गांठ बनने लगती हैशुरुआत में तो इतनी तकलीफ नहीं देती लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ती है तो तकलीफ भी बढ़ती जाती है।
 
3- [https://www.fitnessayurveda.online/2020/06/Home-remedies-of-piles.html प्रोलैप्सड बवासीर ( prolapsed Hemmorhoids])
 
जब अंदरूनी बवासीर बढ़ने लगती है तो वह धीरे-धीरे बाहर की तरफ आने लगती है इस स्थिति को प्रोलेप्सड बवासीर कहा जाता है।
 
4- [https://www.pristyncare.com/hi/blog/piles-homemade-remedies-surgery/ खूनी बवासीर (thrombased hemmoroids])
 
खूनी बवासीर यहां सभी प्रकार के बवासीर में सबसे जटिल बवासीर का प्रकार माना जाता है।क्योंकि इसमें रक्त स्राव होता है तथा रक्त स्राव होने से व्यक्ति कमजोर हो जाता हैतथा ऐसा होने से व्यक्ति बहुत तकलीफ में आ जाता है। अगर मल त्याग के समय खून आए तो यह एक गंभीर समस्या है तथा विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत है।जाता है। जिसे अँग्रेजी में फिस्टुला कहते हें। फिस्टुला प्रकार का होता है। भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है। और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है। कुछ दिन बाद इसी रास्ते से पखाना भी आने लगता है। बवासीर, भगन्दर की आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है। जिसको रिक्टम कैंसर कहते हें। जो कि जानलेवा साबित होता है।
 
== कारण ==
<!--उपचार तथा महामारी विज्ञान-->
हल्के से मध्यम रोग के लिए आरंभिक उपचार में [[dietary fiber|फाइबर]] (रेशेदार) आहार, जलयोजन बनाए रखने के लिए मौखिक रूप से लिए जाने वाले तरल पदार्थ की बढ़ी मात्रा, दर्द से आराम के लिए [[NSAID]] (गैर-एस्टरॉएड सूजन रोधी दवा) और आराम, शामिल हैं। यदि लक्षण गंभीर हों और परम्परागत उपायों से ठीक न होते हों तो अनेक हल्की प्रक्रियाएं अपनायी जा सकती हैं। शल्यक्रिया का उपाय उन लोगों के लिए आरक्षित है जिनमें इन उपायों का पालन करने से आराम न मिलता हो। लगभग आधे लोगों को, उनके जीवन काल में किसी न किसी समय बवासीर की समस्या होती है। परिणाम आमतौर पर अच्छे रहते हैं।
बवासीर के लिए कई तरह की आयुर्वेदिक व [https://www.pristyncare.com/hi/blog/piles-allopathic-medicine/ एलोपैथिक] दवाएं भी मिलती हैं लेकिन, इनका इस्तेमाल करने से पहले चिकत्सक से परामर्श लेना बहुत जरूरी होता है। बवासीर पीड़ादायक होता है अतः पीड़ा के तीव्र होने पर तुरंत ही चिकत्सक से जांच करवाना आवश्यक हो जाता है।
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परम्परागत उपचार में आमतौर पर पोषण से भरपूर [[रेशेदार आहार]] लेना, तथा जलयोजन बनाए रखने के लिए मौखिक रूप से तरल ग्रहण करना, [[गैर-एस्टरॉएड सूजन रोधी दवाएं]] (NSAID), [http://www.readingpartner.net/sitz-bath-kya-hai/ सिट्ज़ स्नान] तथा आराम शामिल हैं।<ref name=Review09/>रेशेदार आहार की बढ़ी मात्रा ने बेहतर परिणाम दर्शाए हैं,<ref name="Alonso-Coello P, Guyatt G, Heels-Ansdell D, et al. 2005 CD004649">{{cite journal | last1 = Alonso-Coello | first1 = P. | last2 = Guyatt |first2 = G. H. | last3 = Heels-Ansdell | first3 = D. | last4 = Johanson | first4 = J. F. | last5 = Lopez-Yarto| first5 = M. | last6 = Mills | first6 = E. | last7 = Zhuo | first7 = Q. | last8 = Alonso-Coello | first8 = Pablo |title=Laxatives for the treatment of hemorrhoids |journal=Cochrane Database Syst Rev |volume= |issue=4|pages=CD004649 |year=2005 |pmid=16235372 |doi=10.1002/14651858.CD004649.pub2 | editor1-last = Alonso-Coello |editor1-first = Pablo }}</ref> तथा इसे आहारीय परिवर्तनों द्वारा या [[fibre supplements|रेशेदार पूरकों]]की खपत से हासिल किया जा सकता है।<ref name=Review09/><ref name="Alonso-Coello P, Guyatt G, Heels-Ansdell D, et al. 2005 CD004649"/> सिट्ज़ स्नान के माध्यम से उपचार के किसी भी बिंदु पर साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।<ref>{{cite journal|last=Lang|first=DS|author2=Tho, PC; Ang, EN|title=Effectiveness of the Sitz bath in managing adult patients with anorectal disorders|journal=Japan journal of nursing science : JJNS|date=2011 Dec|volume=8|issue=2|pages=115–28|pmid=22117576}}</ref> यदि इनको उपयोग किया जाता है तो इनको एक बार में 15 मिनट तक सीमित रखना चाहिए।<ref name=ASCRS2011>{{cite book|last=al.]|first=editors, David E. Beck ... [et|title=The ASCRS textbook of colon and rectal surgery|publisher=स्प्रिंगर|location=New York|isbn=9781441915818|page=182|url=http://books.google.it/books?id=DhQ1A35E8jwC&pg=PA182|edition=2nd ed.|access-date=12 जनवरी 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20131203001151/http://books.google.it/books?id=DhQ1A35E8jwC&pg=PA182|archive-date=3 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
 
हालांकि, बवासीर के उपचार के लिए बहुत सारे स्थानीय एजेंट तथा वर्तियां (सपोसिटरीज़) उपलब्ध हैं, लेकिन इनके समर्थन में साक्ष्य बेहद कम उपलब्ध हैं।<ref name=Review09/> [[स्टेरॉएड]] समाहित एजेंटों को 14 दिन से अधिक की अवधि तक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे त्वचा को पतला करते हैं।<ref name=Review09/> अधिकांश एजेंटों में सक्रिय तत्वों के संयोजन शामिल होते हैं।<ref name=ASCRS2011/> इनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं: एक बाधा क्रीम जैसे [[पेट्रोलियम जेली]] या [[ज़िंक ऑक्साइड]], एक दर्दहारी एजेंट जैसे कि [[लिडोकेन]] और एक वैसोकॉन्सट्रिक्टर (रक्त शिराओं के मुहाने को संकीर्ण करने वाला) जैसे कि [[एपीनेफ्राइन]]।<ref name=ASCRS2011/> [[फ्लैवोनॉएड]] के लाभों पर प्रश्नचिह्न लगता है जिसके कि संभावित पश्च-प्रभाव होते हैं।
<ref name=ASCRS2011/><ref>{{cite journal |author=Alonso-Coello P, Zhou Q, Martinez-Zapata MJ, ''et al.'' |title=Meta-analysis of flavonoids for the treatment of haemorrhoids |journal=Br J Surg |volume=93 |issue=8 |pages=909–20 |year=2006|month=August |pmid=16736537 |doi=10.1002/bjs.5378 |url=}}</ref> लक्षण गर्भवस्था के कारण असमान्य रूप से दिखने हैं; इस कारण से उपचार अक्सर प्रसव के बाद तक टल जाते हैं।<ref>{{cite journal|last=Quijano|first=CE|author2=Abalos, E|title=Conservative management of symptomatic and/or complicated haemorrhoids in pregnancy and the puerperium|journal=Cochrane database of systematic reviews (Online)|date=2005 Jul 20|issue=3|pages=CD004077|pmid=16034920}}</ref>
 
*[https://web.archive.org/web/20140904175254/http://ranchiexpress.com/171767 क्या आप पाइल्स की पीड़ा से परेशान हैं?] (राँची एक्सप्रेस)
*[https://web.archive.org/web/20140905063119/http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/4269/9/198 पाइल्स शर्माएं नहीं, बल्कि आधुनिक विधियों से इलाज कराएं] (देशबन्धु)
*[https://www.pristyncare.com/hi/blog/anal-fissure-yogasana/ पाइल्स के लिए योगासन]
 
[[श्रेणी:रोग]]