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[[Image:Lightning over Oradea Romania 3.jpg|right|thumb|300px200px|]]
'''तड़ित''' (Lightning) या "आकाशीय बिजली" [[पृथ्वी का वायुमण्डल|वायुमण्डल]] में विद्युत आवेश का डिस्चार्ज होना (एक वस्तु से दूसरी पर स्थानान्तरण) और उससे उत्पन्न कड़कड़ाहट (thunder) को तड़ित कहते हैं। संसार में प्रतिवर्ष लगभग 1करोड़ 60 लाख तड़ित पैदा होते हैं।
 
(2) धारीदार या रेखावर्ण (Streak) तड़ित अक्सर दिखलाई पड़ती है। इसमें एक या अधिक प्रकाशरेखाएँ, सीधी या टेढ़ी इधर-उधर दौड़ती हुई दृष्टिगोचर होती हैं। इसमें विद्युद्विसर्जन बादल से बादल में, बादल से धरती में अथवा बादल से वायुमंडल के बीच होता। यह तड़ित स्वयं तीन प्रकार की हो सकती:
 
* (अ) मनकामय (Beaded), जिसमें तड़ित के पूरे मार्ग में प्रकाश कहीं कम रहता है और कहीं-कहीं सघन प्रकाश के केद्र बन जाते हैं और घुंडियों सघ्शसदृश दिखलाई पड़ते हैं,
 
* (ब) द्विशाखित (Forked), जिसमें दो शाखाएँ विभिन्न दिशाओं को जाती हुई दिखलाई पड़ती हैं और
 
* (स) उष्मा तड़ित, जो बहुत दूर पर होनेवाला विद्युद्विसर्जन है, जहाँ से आवाज नहीं पहुँच पाती।
 
 
== तड़ित से रक्षा ==
[[चित्र:CN Tower struck by lightning-Edit(Taxi).jpg|right|thumb|300px|एक ऊंचे टॉवर पर तड़ित का आघात]]
भवनों को तड़ित के सीधे आघात से बचाने के लिये [[बेंजामिन फ्रैंकलिन]] द्वारा विकसित [[तड़ित दंड]] (Lightning rod) व्यवस्था सर्वाधिक श्रेष्ठ है। लोहे का एक छड़, जिसका ऊपरी सिरा [[भाला|भाले]] की भाँति नुकीला होता है और भवन के काफी ऊपर तक निकला रहता है, भवन के पार्श्व से होता हुआ भूमि के अंदर काफी गहराई तक गड़ा रहता है। निचला सिरा भूमि में ताँबे की एक पट्टिका में लगा होता है। यह तड़ित दंड बादल में विद्यमान तड़ित के लिए न्यूनतम प्रतिरोध का मार्ग ही नहीं प्रशस्त करता, प्रत्युतबल्कि यह भवन पर उत्पन्न प्रेरित विद्युदावेशोंविद्युत आवेशों को तत्काल पृथ्वी के अंदर पहुँचा देता है। इस प्रकार यह बादलों और भवन के बीच आवेशों के पारस्परिक आकर्षण की संभावना भी पर्याप्त घटा देता है। अतीत से ही विद्युत्‌ झंझाओं के दिनों में, नाविक अपने जलयानों के मस्तूलों से इस प्रकार बादलों के विद्युत्‌ का क्षरण देखते चले आ रहे हैं। यह क्षरण रात को अधिक स्पष्ट दिखलाई पड़ता है। इसे यूरोपीय नाविक संत एल्मो की अग्नि (St. Elmo's Fire) कहते हैं।
 
आजकल तड़ितनियंत्रण संबंधी अनेक प्रयोग किए जा रहे हैं। एक मनोरंजक प्रयोग मोटरकार में एक व्यक्ति को बैठाकर और उस मोटर पर कृत्रिम तड़ित ऊपर से नीचे की ओर भेजकर किया गया। चूँकि तड़ित में विद्यमान इलेक्ट्रानों में, समान आवेशयुक्त होने के कारण, परस्पर विकर्षण होता है, इसलिये मोटरकार की छत पर गिरते ही वे बिखर गए और उसकी दीवारों से होते हुए नीचे पृथ्वी में चले गए। इससे मोटर के अंदर उनकी पैठ न हो सकी और वह व्यक्ति सर्वथा सुरक्षित रह गया। इस प्रयोग से यह निश्चय हो जाता है कि आधुनिक धातु के ढाँचेवाले भवनों में, जिनकी नींव काफी गहरी होती है, बैठा हुआ व्यक्ति तड़ित के प्रहार से अत्यंत निरापद होता है। यदि ऐसे भवन, अथवा तड़ितचालकयुक्त भवन, न मिल सकें तो ऐसे विशाल भवन में आश्रय लेना चाहिए जो काफी विस्तृत हो। तड़ितयुक्त आँधी तूफान के समय अँगीठियों (fire places), स्टोव तथा विद्युत के अन्य सुचालकों से स्वयं को यथाशक्ति दूर ही रखना चाहिए। बाहर रहनेवालों को पहाड़ियों के ऊपर, पुआल इत्यादि के ढेर पर, एकाकी वृक्षों के नीचे, पताकादंडों (flag poles) के पास, अथवा किसी प्रकार की धातुनिर्मित वस्तु के समीप, कभी न रहना चाहिए, न धातु से बनी किसी वस्तु को ही हाथ में लिए रहना चाहिए। पहाड़ों की कंदराओं में, घने वनों अथवा किसी ढालू पहाड़ी के नीचे रहना सर्वथा निरापद होता है।