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|date = [[माघ]] [[शुक्ल पक्ष|शुक्ल]] [[पंचमी]]
|date{{#time:Y|last year}} = 28 जनवरी
|date{{#time:Y}} = 30 जनवरी <ref>{{cite web |url=http://news.drikpanchang.com/2013/01/vasant-panchami-2013-date.html |title=Updates on current Hindu religious affairs: Vasant Panchami - 14th or 15th Feb |first= |last= |work=news.drikpanchang.com |year=2013 |quote=Panchami Tithi is getting over at 09:05 a.m. on 15th February while it starts at 08:19 a.m. on 14th February |accessdate=1 फ़रवरी 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130206233437/http://news.drikpanchang.com/2013/01/vasant-panchami-2013-date.html |archive-date=6 फ़रवरी 2013 |url-status=livedead }}</ref>
|celebrations =
|observances = [[पूजा]] व सामाजिक कार्यक्रम
[[चित्र:Saraswati f. Strassenpuja.JPG|250px|thumb|right|[[कोलकाता]] में पूजा के लिये निर्मित देवी सरस्वती की प्रतिमा (वर्ष २०००)]]
उपनिषदों की कथा के अनुसार [[सृष्टि]] के प्रारंभिक काल में भगवान [[शिव]] की आज्ञा से भगवान ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।
*तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान [[विष्णु]] तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने [[आदिशक्ति]] [[दुर्गा]] माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।<ref>{{Cite web |url=https://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/comment-page-5/#comments |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180728152947/https://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/comment-page-5/#comments |archive-date=28 जुलाई 2018 |url-status=livedead }}</ref>
*ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी "सरस्वती" कहा।<ref>{{Cite web |url=http://www.aryasamajjamnagar.org/vedang.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100106153131/http://www.aryasamajjamnagar.org/vedang.htm |archive-date=6 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref>
*फिर आदिशक्ति भगवती दुर्गा ने ब्रम्हा जी से कहा कि मेरे तेज से उत्पन्न हुई ये देवी सरस्वती आपकी पत्नी बनेंगी, जैसे लक्ष्मी श्री विष्णु की शक्ति हैं, पार्वती महादेव शिव की शक्ति हैं उसी प्रकार ये सरस्वती देवी ही आपकी शक्ति होंगी। ऐसा कह कर आदिशक्ति श्री दुर्गा सब देवताओं के देखते - देखते वहीं अंतर्धान हो गयीं। इसके बाद सभी देवता सृष्टि के संचालन में संलग्न हो गए।<ref>{{Cite web |url=http://www.vedpuran.com/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100515172142/http://www.vedpuran.com/ |archive-date=15 मई 2010 |url-status=live }}</ref>
 
=== जन्म दिवस ===
'''[[परमार भोज|राजा भोज]]''' का जन्मदिवस वसंत पंचमी को ही आता हैं। राजा भोज इस दिन एक बड़ा उत्सव करवाते थे जिसमें पूरी प्रजा के लिए एक बड़ा प्रीतिभोज रखा जाता था जो चालीस दिन तक चलता था। <ref>{{cite web|url= http://delhipubliclibrary.in/cgi-bin/koha/opac-detail.pl?biblionumber=92037|title= संग्रहीत प्रति|access-date= 22 जनवरी 2018|archive-url= https://web.archive.org/web/20180122125720/http://delhipubliclibrary.in/cgi-bin/koha/opac-detail.pl?biblionumber=92037|archive-date= 22 जनवरी 2018|url-status= livedead}}</ref>
 
वसन्त पंचमी [[हिन्दी साहित्य]] की अमर विभूति महाकवि [[सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला']] का जन्मदिवस (28.02.1899) भी है। निराला जी के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी। वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे डालते थे। इस कारण लोग उन्हें 'महाप्राण' कहते थे। इस दिन जन्मे लोग कोशिश करे तो बहुत आगे जाते है।
1,11,632

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