"नाग प्रक्षेपास्त्र" के अवतरणों में अंतर

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'''नाग प्रक्षेपास्त्र''' ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]: नाग) एक तीसरी पीढ़ी का [[भारत]] द्वारा स्वदेशीय निर्मित, टैंक भेदी [[प्रक्षेपास्त्र]] है। यह उन पाँच (प्रक्षेपास्त्र) मिसाइल प्रणालियों में से एक है जो भारत के [[रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन|रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन]] द्वारा [[:en:Integrated_Guided_Missile_Development_Program|एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम]] के तहत विकसित की गई है। इस प्रक्षेपास्त्र का विकास {{INRConvert|300|c|1}} की लागत से किया गया है। इसकी मारक क्षमता 4 कि० मि०कि०मी० है।
इसका प्रथम सफल परीक्षण नवम्बर 1990 में किया गया है। इसे 'दागो और भूल जाओ' टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र भी कहा जाता है क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद पुनः निर्देशित कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
 
इसका प्रथम सफल परीक्षण नवम्बर 1990 में किया गया है।गया। इसे 'दागो और भूल जाओ' टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र भी कहा जाता है क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद पुनः निर्देशित कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
अभी हाल ही में डीआरडीओ ने 18 जुलाई 2019 को नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का पोखरण में फायरिंग रेंज राजस्थान में सफल परीक्षण किया।
 
अभी18 हालजुलाई ही2019 मेंको डीआरडीओ ने 18 जुलाई 2019 को नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का पोखरण में फायरिंग रेंज राजस्थान में सफल परीक्षण किया।
 
== इन्हें भी देखें ==