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[[चित्र:Taklamakan desert.jpg|thumb|230px|टकलामकान रेगिस्तान का एक दृश्य]]
[[चित्र:Tarimrivermap.png|thumb|230px|नक़्शे में टकलामकान]]
'''टकलामकान मरुस्थल''' (<small>[[उइगुर भाषा|उइग़ुर]]: {{Nastaliq|ur|تەكلىماكان قۇملۇقى}}, तेकलीमाकान क़ुम्लुक़ी</small>) [[मध्य एशिया]] में स्थित एक [[मरुस्थल|रेगिस्तान]] है। इसका अधिकाँश भाग [[चीन]] द्वारा नियंत्रित [[शिंजियांग]] प्रांत में पड़ता है। यह दक्षिण से [[कुनलुन पर्वत|कुनलुन पर्वत शृंखला]], पश्चिम से [[पामीर पर्वतमाला]] और उत्तर से [[तियाँ शान|तियन शान]] की पहाड़ियों द्वारा घिरा हुआ है।<ref name="ref37mahag">{{cite web | title=Taklamakan: The Land of No Return | author=John Schettler | publisher=Authorhouse, 2001 | isbn=9780759655737 | url=http://books.google.com/books?id=D5cr5wxOXTcC}}</ref> [[डारेम नदी]] इसकी उत्तरी सीमा बनाती है। डारेम नदी का अधिकांश बेसिन इसके अंतर्गत आता है। पूर्व से पश्चिम इस मरुस्थल की लंबाई लगभग 1000 किलोमीटर है।
 
प्राचीन काल में यह क्षेत्र उपजाऊ तथा [[बौद्ध संस्कृति]] का केन्द्र था। लेकिन अब यह शुष्क एवं निर्जन प्रदेश है, जहाँ बालू के ३,००० फुट या इससे भी अधिक ऊँचे टीले पाए जाते हैं। यह संसार के बालू के टीलों में से संभवतः सबसे अधिक भयावह तथा वास्तविक मरुस्थल है। यहाँ की भूमि उपजाऊ है तथा जहाँ कहीं सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, वहाँ अच्छी फसलें उत्पन्न की जाती हैं। इस मरुभूमि के किनारों पर कई [[मरूद्यान]] तथा कारवाँ मार्ग हैं। [[यारकेन्द]] तथा [[कोतान]] प्रमुख मरूद्यान हैं। स्वीडेन के अन्वेषक स्वेन एंडर्स हेडिन द्वारा ताकला माकान में महत्वपूर्ण अन्वेषण किए गए थे।
 
== नाम की उत्पत्ति ==