"कुलदीप कौर" के अवतरणों में अंतर

आकार में कोई परिवर्तन नहीं ,  11 माह पहले
Rescuing 6 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.7
(Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.5)
(Rescuing 6 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.7)
 
}}
 
'''कुलदीप कौर''' (1927 - 3 फरवरी 1960), एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री थीं, जिन्होंने [[हिन्दी|हिंदी]] और [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]] फिल्मों में काम किया था।<ref name="Bali">{{Cite web|url=http://upperstall.com/profile/kuldip-kaur/|title=Kuldip Kaur|last=Bali|first=Karan|date=20 March 2015|website=upperstall.com|publisher=The Rest|access-date=23 April 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304191121/http://upperstall.com/profile/kuldip-kaur/|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=livedead}}</ref><ref name="Omnilexica">{{Cite web|url=http://www.omnilexica.com/?q=kuldip+kaur+(actress)|title=Kuldip Kaur Actress|website=omnilexica.com|publisher=Omnilexica|access-date=23 April 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20171016122727/http://www.omnilexica.com/?q=kuldip+kaur+(actress)|archive-date=16 अक्तूबर 2017|url-status=live}}</ref> उन्हें फ़िल्मों में निभाई गई अपनी नकारात्मक भूमिकाओं के लिए जाना जाता है, उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत [[भारत का विभाजन|विभाजन के]] बाद भारत में 1948 में निर्मित पहली [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]] फिल्म ''चमन'' से की; जिसे ''द गार्डन'' भी कहा जाता है।<ref name="GokulsingDissanayake2013">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=djUFmlFbzFkC|title=Routledge Handbook of Indian Cinemas|last=K. Moti Gokulsing|last2=Wimal Dissanayake|date=17 April 2013|publisher=Routledge|isbn=978-1-136-77284-9|access-date=23 April 2015}}</ref>
 
भारतीय सिनेमा में "असाधारण प्रतिभा" और "पहली महिला खलनायक" के रूप में प्रशंसित, उनकी तुलना [[शशि कला|शशिकला]] और [[बिन्दू|बिन्दु]] जैसे कलाकारों से की गई है।<ref name="Rishi2012">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=r623sWyGm0sC&pg=PA47|title=Bless You Bollywood!: A Tribute to Hindi Cinema on Completing 100 Years|last=Tilak Rishi|publisher=Trafford Publishing|year=2012|isbn=978-1-4669-3963-9|pages=47–|access-date=23 April 2015}}</ref> 1948 से 1960 तक सक्रिय, उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें से अधिकांश हिंदी और कुछ पंजाबी में थीं। 1960 में [[धनुस्तम्भ|टेटनस]] से उसकी मृत्यु हो गई।<ref name="Bali">{{Cite web|url=http://upperstall.com/profile/kuldip-kaur/|title=Kuldip Kaur|last=Bali|first=Karan|date=20 March 2015|website=upperstall.com|publisher=The Rest|access-date=23 April 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304191121/http://upperstall.com/profile/kuldip-kaur/|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=live}}</ref>
 
== व्यक्तिगत जीवन ==
कुलदीप कौर का जन्म 1927 में [[लाहौर]], पंजाब, [[ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश भारत]] में एक समृद्ध [[जाट]] परिवार में हुआ था। उनका परिवार पंजाब के [[अमृतसर जिला|अमृतसर जिले]] के [[अटारी, पंजाब|अटारी]] में ज़मींदार था।<ref name="KK">{{Cite book|title=Stars of the Indian Screen|last=Patel|first=Sushila Rani Baburao|date=1952|publisher=Parker and Sons|location=India|pages=23|ref=Kuldip Kaur}}</ref> उनकी शादी महाराजा [[महाराजा रणजीत सिंह|रणजीत सिंह]] की सेना के जनरल कमांडर जनरल शाम सिंह अटारीवाला के पोते मोहिंदर सिंह सिद्धू से हुई थी।<ref name="YoungBites">{{Cite web|url=http://www.sikhchic.com/film_stage/kuldip_kaur_bombays_pioneer_film_actress|title=Kuldip Kaur|website=sikhchic.com|publisher=Young Bites Daily|access-date=23 April 2015|ref=Fem Bio|archive-url=https://web.archive.org/web/20150505171908/http://www.sikhchic.com/film_stage/kuldip_kaur_bombays_pioneer_film_actress|archive-date=5 मई 2015|url-status=livedead}}</ref> चौदह वर्ष की आयु में विवाहित, वह सोलह वर्ष की आयु में माँ बन गई।
 
उन्होंने लाहौर में रहते हुए भी फिल्मों में शामिल होने के लिए परंपराओं को को टाल दिया। 1947 में उन्होंने लाहौर छोड़ दिया, उस समय सांप्रदायिक हिंसा भड़की हुई थी। उन्हें कुलदीप कौर पर [[सआदत हसन मंटो]] द्वारा अपनी पुस्तक: ''स्टार्स फ्रॉम अदर स्काई: द बॉम्बे फिल्म वर्ल्ड ऑफ द 1940'' में एक अध्याय, जिसका शीर्षक "कुलदीप कौर: द पंजाबी पटाखा" था, में उन्हें एक बहादुर महिला के रूप में वर्णित किया गया था। हिंसा के बावजूद कौर, प्राण की कार लेने लाहौर वापस लौट आई। जोकि भारत के विभाजन के बाद लाहौर में हुए सांप्रदायिक दंगे से बचने के लिए प्राण और कौर ने बंबई के लिए रवाना होते समय पीछे छोड गये थे। उसने कार को अकेले [[दिल्ली]] के रास्ते लाहौर से [[मुम्बई|बॉम्बे]] तक चला कर वापस ले आई।<ref name="Manṭo2000">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Ns5jAAAAMAAJ|title=A Manto Panorama: A Representative Collection of Saadat Hasan Manto's Fiction and Non-fiction|last=Saʻādat Ḥasan Manṭo|date=1 January 2000|publisher=Sang-e-Meel Publications|isbn=978-969-35-1089-8|page=234|chapter=Kuldip Kaur: the Punjabi firecracker|access-date=23 April 2015}}</ref>
1,11,632

सम्पादन