"कैथी": अवतरणों में अंतर

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== कैथी के विलोप का खतरा ==
कैथी लिपि को कभी कभी 'बिहार लिपि' भी कहा जाता है। अभी भी बिहार समेत देश के उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों में इस लिपि में लिखे हजारों अभिलेख हैं। समस्‍या तब होती है जब इन अभिलेखों से संबंधित कानूनी अडचनें आती हैं। [[दैनिक जागरण]] के [[पटना]] संस्‍करण में नौ सितंबर 2009 को पेज बीस पर बक्‍सर से छपी कंचन किशोर की एक खबर का संदर्भ लें तो इस लिपि के जानकार अब उस जिले में केवल दो लोग बचे हैं। दोनों काफी उम्र वाले हैं। ऐसे में निकट भविष्‍य में इस लिपि को जानने वाला शायद कोई न बचेगा और तक इस लिपि में लिखे भू-अभिलेखों का अनुवाद आज की प्रचलित लिपियों में करना कितना कठिन होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। भाषा के जानकारों के अनुसार यही स्थिति सभी जगह है। ऐसे में जरूरत है इस लिपि के संरक्षण की।
 
भारत में सबसे अधिक विवादित जमीन बिहार में है। इसका  प्रमुख कारण है [https://www.kaithilipi.com/2020/07/blog-post_76.html कैथी लिपि]। भूमि सम्बंधित सभी पुराने कागज़ कैथी में हैं। इन्हें पढ़ सकने वाले लोगों की संख्या न के बराबर है। भूमि सम्बंधित विभाग इन्हे पढ़ नहीं पाते। ना ही बैंक इन कागज़ों के आधार पर लोन ही दे पाती हैं। भूमि विवाद न्यायालयों में सुलझ भी नहीं पाते। <ref>{{Cite web|url=https://www.kaithilipi.com/2020/07/blog-post_76.html|title=कैथी लिपि क्या है|last=|first=|last2=|date=|website=www.kaithilipi.com|language=Hindi - English|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2020-10-02|last3=|last4=|last5=|last6=|first6=}}</ref>
 
[[दैनिक जागरण]] के [[पटना]] संस्‍करण में नौ सितंबर 2009 को पेज बीस पर बक्‍सर से छपी कंचन किशोर की एक खबर का संदर्भ लें तो इस लिपि के जानकार अब उस जिले में केवल दो लोग बचे हैं। दोनों काफी उम्र वाले हैं। ऐसे में निकट भविष्‍य में इस लिपि को जानने वाला शायद कोई न बचेगा और तक इस लिपि में लिखे भू-अभिलेखों का अनुवाद आज की प्रचलित लिपियों में करना कितना कठिन होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। भाषा के जानकारों के अनुसार यही स्थिति सभी जगह है। ऐसे में जरूरत है इस लिपि के संरक्षण की।
 
== यूनिकोड ==
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