"केशवदास": अवतरणों में अंतर

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== छंद ==
 
छंदों के विषय केशव का ज्ञान अपार था। जितने प्रकार के छंदों का प्रयोग उन्होंने किया हिंदी साहित्य में किसी ने नहीं किया। रामचंद्रिका में तो छंदों की विविधता इस सीमा तक पहुँच गई है कि विद्वानों ने उसे शब्दोंछंदों का अजायबघर कह दिया है। केशव ने स्वतः लिखा है -
 
:रामचंद्र की चंद्रिका बरनति हौं बहु छंद।
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