"हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य" के अवतरणों में अंतर

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'''पूर्वी हिंदी''' की तीन शाखाएँ हैं - [[अवधी]], [[बघेली]] और छत्तीसगढ़ी। अवधी अर्धमागधी प्राकृत की परंपरा में है। यह अवध में बोली जाती है। इसके दो भेद हैं - पूर्वी अवधी और पश्चिमी अवधी। अवधी को बैसवाड़ी भी कहते हैं। तुलसी के [[रामचरितमानस]] में अधिकांशत: पश्चिमी अवधी मिलती हैं और जायसी के पदमावत में पूर्वी अवधी। बघेली बघेलखंड में प्रचलित है। यह अवधी का ही एक दक्षिणी रूप है। छत्तीसगढ़ी पलामू (झारखण्ड) की सीमा से लेकर दक्षिण में बस्तर तक और पश्चिम में बघेलखंड की सीमा से उड़ीसा की सीमा तक फैले हुए भूभाग की बोली है। इसमें प्राचीन साहित्य नहीं मिलता। वर्तमान काल में कुछ लोकसाहित्य रचा गया है।
 
== बिहारी ==
 
== बिहारी, राजस्थानी == बिहारी हिंदी के अंतर्गत [[मगही]], [[भोजपुरी,]] आदि बोलियां आती हैंहैं।
 
 
 
== बिहारी, राजस्थानी == बिहारी हिंदी के अंतर्गत मगही,भोजपुरी,आदि बोलियां आती हैं
 
== और पहाड़ी ==
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