"भाषाविज्ञान का इतिहास" के अवतरणों में अंतर

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*(४) व्युत्पत्ति - प्रकृति और प्रत्यय के आधार पर शब्दों का विवेचन।
 
पाणिनि के अन्य ग्रन्थ हैं - [[उणादि सूत्र|उणादिसूत्र]], [[लिंगानुशासन]] और [[पाणिनीय शिक्षा]]।शिक्षा। पाणिनिकालीन (कुछ विद्वानों के अनुसार उत्तरकालीन) में [[कात्यायन]] एवं [[पतञ्जलि|पतंजलि]] विशेष उल्लेखनीय हैं। कात्यायन ने कार्तिक में पाणिनि के सूत्रों का विश्लेषण तो किया ही, अनेक दोषों की ओर भी संकेत किया। भाषावैज्ञानिक दृष्टि से उन संकेतों का भी बड़ा महत्त्व है, क्योंकि समय-परिवर्त्तन तथा भाषा-विकास के साथ भाषा-सम्बन्धी नियमों में भी परिवर्त्तन की अपेक्षा हुआ करती है।
 
;पतंजलि और उनका [[महाभाष्य]] :
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