"भाषा विकास": अवतरणों में अंतर

16,653 बैट्स् नीकाले गए ,  1 वर्ष पहले
पृष्ठ को ''''भाषा विकास''' (Language development) ऐसी प्रक्रिया है जो मानव जीव...' से बदल रहा है।
No edit summary
टैग: Reverted
(पृष्ठ को ''''भाषा विकास''' (Language development) ऐसी प्रक्रिया है जो मानव जीव...' से बदल रहा है।)
टैग: बदला गया Manual revert Reverted
भाषा विकास के कार्य
भाषा यह व्यक्ति की आवश्यकता, इच्छा, शिकायत, विचार, अनुभव क साधन है। भाषा के माध्यम से व्यक्ति अपनी भावना प्रकट कर समता है।भाषा यह जानकारी और कोशल सीखने का एक साधन है। भाषा के कारण सामाजिक अंतरक्रिया चालू रहती है। मानव का एक दूसरे से संवाद शुरू होता है।
 
भाषा विकास के टप्पे : भाषा विकास की अनेक चरण है। उमेश से निम्नलिखित मुख्य 4 चरण है-
 
१. आकलन २. शब्दसंग्रह बढाना ३. वाक्यरचना ४.
 
१. आकलन मतलब दुसऱे का बोला हुआ समझना। आकलन यह भाषा विकास का पहला और महत्त्वपूर्ण टप्पा है। इस टप्पे में सामने वाले को क्या बोलना है यह समझता है। यह सामने वाले के आवाज के गुस्से से, कोमलपन का भाव जैसे भाव अपने के समजते है। आकलन करने से हम सामने वाले की सूचना समझ सरते है और उपकार पालन भी कर सकते है। मनुष्य की आकलनशक्ती यह उस व्यक्ती की बौद्धीक क्षमता पर निर्भर करती है इस कारण प्रत्येक मनुष्य की आकलनशक्ती यह अलग अलग होती है।
 
 
शब्दसंग्रह बढाना- मतलब नवीन शब्दाें का संग्रह करना। शब्दसंग्रह यह दो प्रकार के होते है- १. सामान्य शब्दसंग्रह और २. विशेष शब्दसंग्रह. सामान्य शब्दसंग्रह में संज्ञा, सर्वनाम व क्रिया का समावेश होता है। इन शब्दसंग्रह में रोज के जीवन में उपयोग में लाख जानेवाले शब्दाें का और क्रिया का समावेश होता है। विशेष शब्द संग्रह में कुछ नए शब्दाें का समावेश होता है। उसमें व्यक्ती स्वयं के रोज के जीवन के अनुभव से कुछ नवीन शब्द सीखता रहता है। रंगाें के नाम, नदियोम के नाम, विषय के नाम इत्यादी विभिन्न नामो का समावेश होता।
 
३. वाक्यरचना मतलब अलग-अलग शब्द व्याकरण की द्रुष्टी से एकत्र करके एखादे वाक्य तयार करना। वाक्याें के अनेक प्रकार है। इसमें छोटे वाक्ये, बडी वाक्ये, कठिन वाक्य, विस्मयकारक वाक्य, प्रश्न वाचक वाक्य, आदि का समावेश होता है। वाक्य रचना से व्यक्ति का भाषा विकास दिखाई देता है।
 
 
 
 
 
 
 
{{स्रोतहीन|date=मई 2019}}
'''भाषा विकास''' (Language development) ऐसी प्रक्रिया है जो मानव जीवन में बहुत पहले आरम्भ हो जाती है। नवजात बिना किसी भाषा के जन्म लेता है किन्तु मात्र १० मास में ही बोली गयी बातों को अन्य ध्वनियों से अलग करने में सक्षम हो गया होता है।
 
[[श्रेणी:भाषा विकास]]
विकास एक प्रक्रिया है जिसे मानवीय जीवन की शुरुआत में शुरू किया जाता है। शिशुओं का विकास भाषा के बिना शुरू होता है, फिर भी 10 महीने तक, बच्चे भाषण की आवाज को अलग कर सकते हैं और वे अपनी मां की आवाज़ और भाषण पैटर्न पहचानने लगते है और जन्म के बाद अन्य ध्वनियों से उन्हें अलग करने लगते है। [1]
 
आम तौर पर, उत्पादक भाषा को प्रारंभिक संचार के एक चरण के साथ शुरू करने के लिए माना जाता है जिसमें शिशु दूसरों के लिए अपने इरादों को ज्ञात करने के लिए इशारों और बोलने का उपयोग करते हैं विकास के एक सामान्य सिद्धांत के अनुसार, नए रूप तब पुराने कार्यों पर ले जाते हैं, ताकि बच्चों को उसी बातचीतत्मक कार्य को व्यक्त करने के लिए शब्द सीख सकें, जो कि वे पहले से ही कामुक साधनों द्वारा व्यक्त किए हैं। [2]
 
सैद्धांतिक ढांचे संपादन
 
मुख्य लेख: भाषा अधिग्रहण
 
भाषा के विकास को सीखने की साधारण प्रक्रियाओं के द्वारा आगे बढ़ना माना जाता है जिसमें बच्चों को भाषाई इनपुट से शब्दों, अर्थों और शब्दों के प्रयोग और बोलने का उपयोग होता है। [उद्धरण वांछित] जिस पद्धति में हम भाषा कौशल विकसित करते हैं वह सार्वभौमिक है; हालांकि, मुख्य बहस यह है कि कैसे सिंटैक्स के नियमों का अधिग्रहण किया जाता है। [उद्धरण वांछित] वाक्यविन्यास के विकास के लिए दो प्रमुख दृष्टिकोण हैं, एक अनुभववादी खाता जिसके द्वारा बच्चों ने भाषाई इनपुट से सभी वाक्यविन्यास नियम और एक नैतिकवादी दृष्टिकोण प्राप्त किया है जिसके द्वारा कुछ सिद्धांत वाक्यविन्यास जन्मजात हैं और मानव जीनोम के माध्यम से प्रेषित हैं। [उद्धरण वांछित]
 
नोम चॉम्स्की द्वारा प्रस्तावित नतीविवादी सिद्धांत, तर्क देती है कि भाषा एक अद्वितीय मानवीय उपलब्धि है। [उद्धरण वांछित] चोम्स्की कहती है कि सभी बच्चों को एक सहज भाषा अधिग्रहण डिवाइस (एलएडी) कहा जाता है। सैद्धांतिक रूप से, एलएडी मस्तिष्क का एक क्षेत्र है जिसमें सभी भाषाओं के लिए सार्वभौमिक वाक्यविन्यास नियम हैं। यह उपकरण सीखी शब्दावली का उपयोग करके उपन्यास वाक्य बनाने की क्षमता वाले बच्चों को प्रदान करता है। चॉम्स्की का दावा यह विचार है कि जो बच्चे सुनते हैं-उनका भाषाई इनपुट-यह समझाने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे भाषा कैसे सीखते हैं। [उद्धरण वांछित] उनका तर्क है कि पर्यावरण से भाषाई इनपुट सीमित और त्रुटियों से भरा है। इसलिए, नितविवादियों का मानना ​​है कि बच्चों के लिए अपने वातावरण से भाषाई जानकारी सीखना असंभव है। [उद्धरण वांछित] हालांकि, क्योंकि बच्चों के पास इस लैड है, वे वास्तव में, उनके वातावरण से अपूर्ण जानकारी के बावजूद भाषा सीखने में सक्षम हैं। इस दृष्टिकोण ने पचास वर्षों से भाषाई सिद्धांत पर हावी है और अत्यधिक प्रभावशाली रहता है, जैसा कि पत्रिकाओं और पुस्तकों में लेखों की संख्या के रूप में देखा गया है। [उद्धरण वांछित]
 
अनुभववादी सिद्धांत बताता है, चोम्स्की के खिलाफ, कि भाषाई इनपुट प्राप्त करने वाले बच्चों में पर्याप्त जानकारी है और इसलिए, एक सहज भाषा अधिग्रहण डिवाइस (ऊपर देखें) को ग्रहण करने की कोई जरूरत नहीं है। लैड की तुलना में भाषा के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया था, अनुभववादी मानते हैं कि भाषा अधिग्रहण के लिए सामान्य मस्तिष्क प्रक्रिया पर्याप्त मात्रा में है। इस प्रक्रिया के दौरान, बच्चे के लिए सक्रिय रूप से अपने पर्यावरण के साथ संलग्न होना आवश्यक है। एक बच्चे को भाषा सीखने के लिए, माता-पिता या देखभाल करने वाले बच्चे के साथ उचित रूप से संचार करने के एक विशेष तरीके को गोद लेते हैं; इसे बाल-निर्देशित भाषण (सीडीएस) के रूप में जाना जाता है। [उद्धरण वांछित] सीडीएस का प्रयोग किया जाता है ताकि बच्चों को उनकी भाषा के लिए आवश्यक भाषाई जानकारी दी जा सके। अनुभववाद एक सामान्य दृष्टिकोण है और कभी-कभी इंटरैक्शनवादी दृष्टिकोण के साथ भी जाता है। सांख्यिकीय भाषा अधिग्रहण, जो अनुभववादी सिद्धांत के अंतर्गत आता है, सुझाव देते हैं कि शिशुओं को पैटर्न धारणा के माध्यम से भाषा प्राप्त होती है। [उद्धरण वांछित]
 
अन्य शोधकर्ता एक इंटरैक्टिस्टिक परिप्रेक्ष्य को स्वीकार करते हैं, जिसमें भाषा के विकास के सामाजिक-इंटरैक्टिव सिद्धांत शामिल होते हैं। इस तरह के दृष्टिकोण में, बच्चे इंटरैक्टिव और संवादात्मक संदर्भ में भाषा सीखते हैं, संचार की सार्थक चाल के लिए भाषा के रूप सीखते हैं। ये सिद्धांत मुख्य रूप से उत्पादक भाषा की आदतों को बढ़ावा देने के लिए अपने बच्चों को देखभाल करने वालों के दृष्टिकोण और ध्यान पर ध्यान देते हैं। [3]
 
एक पुराने अनुभववादी सिद्धांत, बी एफ स्किनर द्वारा प्रस्तावित व्यवहारवादी सिद्धांत ने सुझाव दिया कि भाषा ऑपरेटेंट कंडीशनिंग के माध्यम से, अर्थात् उत्तेजनाओं की नकल और सही प्रतिक्रियाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से सीखी जाती है। इस परिप्रेक्ष्य को किसी भी समय व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन कुछ खातों द्वारा, पुनरुत्थान का अनुभव हो रहा है नए अध्ययनों से इस सिद्धांत का उपयोग अब ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकारों का निदान करने वाले व्यक्तियों के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, रिलेशनल फ़्रेम थ्योरी व्यवहारवादी सिद्धांत से बढ़ रहा है, जो कि स्वीकाटन और कमेटमेंट थेरेपी के लिए महत्वपूर्ण है। [4] कुछ अनुभववादी सिद्धांत आजकल व्यवहारवादी मॉडल का उपयोग करते हैं। [5]
 
भाषा के विकास के बारे में अन्य प्रासंगिक सिद्धांतों में संज्ञानात्मक विकास के पाइगेट सिद्धांत शामिल हैं, जो सामान्य संज्ञानात्मक विकास [6] की निरंतरता के रूप में भाषा के विकास को समझते हैं और विगोत्स्की के सामाजिक सिद्धांतों से एक व्यक्ति की सामाजिक बातचीत और विकास के लिए भाषा के विकास को श्रेय देता है
बेनामी उपयोगकर्ता