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== जाति का समावेश ==
जनगणना में किसी व्यक्ति की जाति से संबंधित सूचना का समावेश, सत्तारूढ़ गठबंधन के कई बड़े नेताओं जैसे कि [[लालू प्रसाद यादव]], [[शरद यादव]], [[मुलायम सिंह यादव]] और [[मायावती]] जैसे नेताओं की जोरदार मांग पर किया गया। इसी मांग का समर्थन विपक्षी पार्टियों जैसे कि [[भारतीय जनता पार्टी]], [[अकाली दल]], [[शिवसेना]] और [[अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम]]<ref>{{Cite web |url=http://timesofindia.indiatimes.com/India/Demand-for-caste-census-rocks-Lok-Sabha/articleshow/5887995.cms |title=Demand for caste census rocks Lok Sabha |access-date=5 अप्रैल 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100515103253/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Demand-for-caste-census-rocks-Lok-Sabha/articleshow/5887995.cms |archive-date=15 मई 2010 |url-status=live }}</ref> दलों द्वारा भी किया गया। जाति संबंधी सूचना का समावेश पिछली बार [[ब्रिटिश राज]] के दौरान हुई 1931 की जनगणना में किया गया था। शुरुआती जनगणनाओं के दौरान, लोग अक्सर समाज में खुद को ऊँचे तबके का दिखाने के लिए अपनी जाति को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया करते थे, पर इस बार लगता है कि लोग सरकारी लाभ पाने के उम्मीद में अपनी जाति को निम्न बताने की चेष्टा करें।<ref>{{Cite web |url=http://www.timesonline.co.uk/tol/news/world/asia/article7122236.ece |title=India to conduct first record of nation’s caste system since days of the Raj |access-date=5 अप्रैल 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100528201456/http://www.timesonline.co.uk/tol/news/world/asia/article7122236.ece |archive-date=28 मई 2010 |url-status=live }}</ref>
 
स्वतंत्र भारत में जाति-गणना का सिर्फ एक उदाहरण मिलता है। केरल में 1968 में ई.एम.एस. नंबूदिरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार के द्वारा विभिन्न निचली जातियों के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आकलन के लिए जाति-गणना की गयी थी। इस जनगणना को '''1968 का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण''' कहा गया था और इसके परिणाम केरल के 1971 के राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे।<ref>केरल सरकार 1971: अनुच्छेद XVIII</ref>
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