"मोढेरा सूर्य मंदिर" के अवतरणों में अंतर

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'''मोढेरा सूर्य मंदिर''' [[गुजरात]] के [[मेहसाना जिला|मेहसाना जिले]] के “[[मोढेरा]]” नामक गाँव में [[पुष्पावती नदी]] के किनारे प्रतीष्ठित है। यह स्थान [[पाटन]] से ३० किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह [[सूर्य मंदिर|सूर्य मन्दिर]] भारतवर्ष में विलक्षण स्थापत्य एवम् शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है। [[सोलंकी वंश]] के राजा [[भीमदेव प्रथम]] द्वारा सन् [[१०२६]]-[[१०२७]] ई.ई॰ में इस मन्दिर का निर्माण किया गया था। वर्तमान समय में यह [[भारतीय पुरातत्व विभाग]] के संरक्षण में है और इस मन्दिर में पूजा करना निषिद्ध है।
 
इस मन्दिर परिसर के मुख्य तीन भाग हैं- गूढ़मण्डप (मुख्य मन्दिर), सभामण्डप तथा कुण्ड (जलाशय)। इसके [[मण्डप|मण्डपों]] के बाहरी भाग तथा [[स्तम्भ|स्तम्भों]] पर अत्यन्त सूक्ष्म नक्काशी की गयी है। कुण्ड में सबसे नीचे तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हैं तथा कुछ छोटे-छोटे मन्दिर भी हैं।
इस सूर्य मंदिर परिसर का निर्माण एक ही समय में नहीं हुआ था। मुख्य मन्दिर, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] के [[भीमदेव प्रथम]] के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।<ref name="Sankalia1941">{{cite book|author=हसमुख धीरजलाल जंजीर|title=गुजरात का पुरातत्व: काठियावाड़ सहित|url=https://books.google.com/books?id=fvAdAAAAMAA|archive-url=http://www.dli.ernet.in/handle/2015/51876|archive-date=2015|year=1941|publisher=नटवरलाल & कंपनी|pages=70, 84–91}}</ref><ref>{{cite web|title=मोढ़ेरा (गुजरात) में सूर्य-मंदिर|url=http://ignca.nic.in/nl002206.htm|access-date=9 April 2016|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20160429110946/http://ignca.nic.in/nl002206.htm|archivedate=29 April 2016|df=dmy-all}}</ref><ref name="Kapoor2002">{{cite book|author=सुबोध कपूर|title=द इंडियन इनसाइक्लोपीडिया: मेया-नेशनल कांग्रेस|url=https://books.google.com/books?id=ncL8Ve9FqNwC&pg=PA4871|year=2002|publisher=Cosmo Publications|isbn=978-81-7755-273-7|pages=4871–4872}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/annualreportofth014526mbp|title=पुरातत्व निदेशक के वार्षिक रिपोर्ट, बड़ौदा राज्य, 1934-35|last=शास्त्री|first=हीरानन्द|date=नवम्बर 1936|publisher=ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट|others=|year=|isbn=|location=बड़ौदा|pages=8–9}}</ref> इससे पहले, 1024-25 के दौरान, गजनी के [[महमूद ग़ज़नवी|महमूद]] ने भीम के राज्य पर आक्रमण किया था, और लगभग 20,000 सैनिकों की एक टुकड़ी ने उसे मोढेरा में रोकेने का असफल प्रयास किया था। इतिहासकार ए.के. मजूमदार के अनुसार इस सूर्य मंदिर का निर्माण इस रक्षा के स्मरण के लिए किया गया हो सकता है।<ref>{{cite book |author=अशोक कुमार मजूमदार |title=गुजरात के चालुक्य |url=https://books.google.ca/books?id=ffAdAAAAMAAJ |publisher=भारतीय विद्या भवन |year=1956 |oclc=4413150 |page=45 |access-date=23 जुलाई 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190326162638/https://books.google.ca/books?id=ffAdAAAAMAAJ |archive-date=26 मार्च 2019 |url-status=live }}</ref> परिसर की पश्चिमी दीवार पर, उल्टा लिखा हुआ देवनागरी लिपि में "[[विक्रम संवत]] 1083" का एक शिलालेख है, जो 1026-1027 सीई के अनुरूप है। कोई अन्य तिथि नहीं मिली है। जैसा कि शिलालेख उल्टा है, यह मन्दिर के विनाश और पुनर्निर्माण का सबूत देता है। शिलालेख की स्थिति के कारण, यह दृढ़ता से निर्माण की तारीख के रूप में नहीं माना जाता है। शैलीगत आधार पर, यह ज्ञात है कि इसके कोने के मंदिरों के साथ कुंड 11वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया गया था। शिलालेख को निर्माण के बजाय गजनी द्वारा विनाश की तारीख माना जाता है। इसके तुरंत बाद भीम सत्ता में लौट आए थे। इसलिए मंदिर का मुख्य भाग, लघु और कुंड में मुख्य मंदिर 1026 ई के तुरन्त बाद बनाए गए थे। 12वीं शताब्दी की तीसरी तिमाही में द्वार, मंदिर के बरामदे और मंदिर के द्वार और कर्ण के शासनकाल के दौरान कक्ष के द्वार के साथ नृत्य कक्ष को बहुत बाद में जोड़ा गया था।<ref>{{cite book|first=वाइक|last=लोबो|title=मोढेरा स्थित सूर्य मंदिर: वास्तुकला और आइकनोग्राफी पर एक मोनोग्राफ|url=https://books.google.com/books?id=89EjAAAAMAAJ|year=1982|publisher=Verlag C.H. Beck|isbn=978-3-406-08732-5|language=अंग्रेजी|page=32,|access-date=23 जुलाई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20171024120348/https://books.google.com/books?id=89EjAAAAMAAJ|archive-date=24 अक्तूबर 2017|url-status=live}}</ref>
 
इस स्थान को बाद में स्थानीय रूप से ''सीता नी चौरी'' और ''रामकुंड'' के नाम से जाना जाने लगा।<ref name="Lobo1982">{{cite book|author=वाइक लोबो|title=मोढेरा स्थित सूर्य मंदिर: वास्तुकला और आइकनोग्राफी पर एक मोनोग्राफ|url=https://books.google.com/books?id=89EjAAAAMAAJ|year=1982|publisher=सी.एच. बेक|isbn=978-3-406-08732-5|page=2|language=अंग्रेजी|access-date=23 जुलाई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20171024120348/https://books.google.com/books?id=89EjAAAAMAAJ|archive-date=24 अक्तूबर 2017|url-status=live}}</ref> अब यहांयहाँ कोई पूजा नहीं की जाती है। मंदिर राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] के देखरेख में है।
 
==वास्तु-कला==
सभामण्डप, गूढमण्डप के साथ जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि एक अलग संरचना के रूप में इसे थोड़ा दूर रखा गया है। दोनों एक पक्के मंच पर बने हैं।<ref name="Sankalia1941"/> इनकी छतें बहुत पहले ढह गई है, अब बस उसके कुछ निचले हिस्से ही बचे हैं। दोनों छतें 15 फुट 9 इंच व्यास की हैं, लेकिन अलग-अलग तरीके से बनाई गई हैं।<ref name="Dhaky 1969">{{cite journal| last=ढ़ाके| first=एम.ए.| title=सूर्य मंदिर, मोढ़ेरा के नृत्य हॉल की तारीख| journal=एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बॉम्बे की जर्नल| publisher=एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बॉम्बे| volume=38| year=1963| pages=211–222| url=http://vmis.in/Resources/digital_publication_popup?id=38#page/2| doi=| accessdate=31 दिसम्बर 2016| language=अंग्रेजी| archive-url=https://web.archive.org/web/20170101002313/http://vmis.in/Resources/digital_publication_popup?id=38#page/2| archive-date=1 जनवरी 2017| url-status=dead}}</ref> मंच या प्लिंथ, उल्टे कमल के आकार का है।
 
मंडप में सुन्दरता से गढ़े पत्थर के स्तम्भ अष्टकोणीय योजना में खड़े किये गये है जो अलंकृत तोरणों को आधार प्रदान करते हैं। मंडप की बाहरी दीवारों पर चारों ओर आले बने हुए हैं जिनमें 12 [[आदित्य|आदित्यों]], [[दिक्पाल|दिक्पालों]], [[देवी|देवियों]] तथा [[अप्सरा]]ओं की मूर्तियाँ प्रतिष्ठापित हैं। सभामण्डप (अथवा, नृत्यमण्डप),जो कि कोणीय योजना में बना है,भी सुन्दर स्तम्भों से युक्त है। सभामण्डप में चारों मुख्य दिशाओं से प्रवेश हेतु अर्धवृतीय अलंकृत तोरण हैं। सभामण्डप के सामने एक बड़ा तोरण द्वार है। इसके ठीक सामने एक आयताकार कुंड है, जिसे "सूर्य कुण्ड"' कहते हैं (स्थानीय लोग इसे "राम कुण्ड" कहते हैम।हैं।) कुण्ड के जल-स्तर तक पहुँचने के लिये इसके अंदर चारों ओर प्लेटफार्म तथा सीठियाँसीढ़ियाँ बनाई गई हैं। साथ ही कुंड के भीतर लघु आकार के कई छोटे बड़े मंदिर भी निर्मित किए गए हैं जो कि देवी-देवताओं, जैसे देवी [[शीतला माता|शीतलामाता]], [[गणेश]], [[शिव]] (नटेश), शेषशायी-[[विष्णु]] तथा अन्य को समर्पित किए गए हैं।
 
==मोढेरा नृत्य समारोह==
गुजरात के पर्यटन निगम के द्वारा जनवरी के तीसरे सप्ताह में [[उत्तरायण सूर्य|उत्तरायण]] त्योहारत्यौहार के बाद मंदिर में 'उत्तरार्ध महोत्सव' मनाया जाता है, जिसमें प्रत्येक वर्ष तीन दिवसीय नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य शास्त्रीय नृत्य रूपों को उसी तरह के माहौल में प्रस्तुत करना है, जिसमें वे मूल रूप से प्रस्तुत किए जाते थे।<ref>{{cite news |title=मोढेरा सूर्यमंदिर में स्थापत्य व नृत्य का संगम |url=https://www.patrika.com/ahmedabad-news/uttarardh-festival-in-modhera-surya-mandir-4074451/ |accessdate=16 जुलाई 2019 |publisher=पत्रिका |date=2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190716112824/https://www.patrika.com/ahmedabad-news/uttarardh-festival-in-modhera-surya-mandir-4074451/ |archive-date=16 जुलाई 2019 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |title=गुजरात के त्यौहार |url=https://hindi.gktoday.in/gyankosh/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8C%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0/ |website=hindi.gktoday |accessdate=16 जुलाई 2019}}</ref>
 
==अवस्थिति==
यह [[गुजरात]], भारत में मोढेरा गांवगाँव में स्थित है, जो [[महेसाणा]] से 25 किमीकि॰मी॰ और [[अहमदाबाद]] से 106 किमीकि॰मी॰ दूर पर स्थित है।
== चित्र दीर्घा ==
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*[https://web.archive.org/web/20180308154310/http://www.punjabkesari.in/dharm/news/modhera-sun-temple-famous-in-the-world-636015 विश्व में प्रसिद्ध है मोढेरा का सूर्य मन्दिर]
*[https://hindi.livehistoryindia.com/history-daily/2019/09/21/modhera-surya-mandir मोढेरा सूर्य मन्दिर] (लाइव_हिस्ट्री_इंडिया)
*[https://web.archive.org/web/20171128170218/http://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-do-you-know-about-the-historic-sun-temple-modhera-17012707.html ऐतिहासिक सूर्य मंदिर मोढेरा, जहांजहाँ मना है भगवान सूर्य की पूजा]
 
{{प्रमुख सूर्य मंदिर}}