"परमार वंश" के अवतरणों में अंतर

21 बैट्स् जोड़े गए ,  5 माह पहले
सम्पादन सारांश रहित
छो (Pasword wiki (वार्ता) द्वारा किए बदलाव 4841515 को पूर्ववत किया, हटाया)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन किए हुए कार्य को पूर्ववत करना उन्नत मोबाइल सम्पादन
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका Reverted
 
== परिचय ==
परमार एक राजवंश का नाम है, जो मध्ययुग के प्रारम्भिक काल में महत्वपूर्ण हुआ। [[चारण (जाति)|चारण]] कथाओं में इसका उल्लेख [[राजपूत|गुर्जर]] जाति के एक [[गोत्र]] रूप में मिलता है।
 
=== कथा ===
[[सिंधुराज|परमार सिन्धुराज]] के दरबारी कवि [[पद्मगुप्त|पद्मगुप्त परिमल]] ने अपनी पुस्तक 'नवसाहसांकचरित' में एक कथा का वर्णन किया है। ऋषि [[वशिष्ठ]] ने ऋषि [[विश्वामित्र]] के विरुद्ध युद्ध में सहायता प्राप्त करने के लिये आबु पर्वत पर यज्ञ किया। उस यज्ञ के अग्निकुंड से एक पुरुष प्रकट हुआ । दरअसल ये पुरुष वे थे जिन्होंने ऋषि वशिष्ठ को साथ देने का प्रण लिया जिनके पूर्वज अग्निवंश के क्षत्रिय थे। इस पुरुष का नाम प्रमार रखा गया, जो इस वंश का संस्थापक हुआ और उसी के नाम पर वंश का नाम पड़ा। परमार के अभिलेखों में बाद को भी इस कहानी का पुनरुल्लेख हुआ है। इससे कुछ लोग यों समझने लगे कि परमारों का मूल निवासस्थान आबू पर्वत पर था, जहाँ से वे पड़ोस के देशों में जा जाकर बस गए। किंतु इस वंश के एक प्राचीन अभिलेख से यह पता चलता है कि परमार दक्षिण के राष्ट्रकूटों के उत्तराधिकारी थे।{{citation needed}}
65

सम्पादन