"अष्टछाप": अवतरणों में अंतर

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:''प्रेम के पुंज में रासरस कुंज में, ताही राखत रसरंग भारी ॥
:''श्री यमुने अरु प्राणपति प्राण अरु प्राणसुत, चहुजन जीव पर दया विचारी ।
:'''‘छीतस्वामी‘ गिरिधरन श्री विट्ठल प्रीत के लिये अब संग धारी ॥
 
* [[नंददास]] (१५३३ ई. - १५८६ ई.)