"अरस्तु" के अवतरणों में अंतर

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{{Infobox philosopher
| name = अरस्तु
| image = Aristotle Altemps Inv8575.jpg
| birth_date = 384 ईसा पूर्व
| death_date = {{nowrap|322 ईसा पूर्व (उम्र 62)<br/>[[एउबोएअ]], यूनान}}
| nationality = [[यूनानी]]
| era = [[प्राचीन दर्शन]]
| region = [[पाश्चात्य दर्शन]]
| school_tradition = {{Unbulleted list |[[Peripatetic school]] |[[अरस्तुवाद]]}}
| main_interests = {{hlist|[[जीव विज्ञान]]|[[प्राणी विज्ञान]]}} {{hlist|[[भौतिक शास्त्र]]|[[तत्वमीमांसा]]}} {{hlist|[[तर्कशास्त्र]]|[[नीतिशास्त्र]] (Ethics)|[[व्याख्यान शास्त्र]]}} {{hlist|संगीत |काव्य |रंगमंच}} {{hlist|राजनीति |सरकार}}
| notable_ideas = {{Unbulleted list |[[Golden mean (philosophy)|Golden mean]] |[[Aristotelian logic]] |[[Syllogism]] |[[Hexis]] |[[Hylomorphism]] |[[On the Soul|Theory of the soul]]}}
| influences = {{hlist |[[पारमेनीडेस]] |[[सुकरात]] |[[प्लेटो]] |[[हेरक्लिटस]] |[[डेमी क्रिट्स]]}}
| influenced = {{longitem|वस्तुतः बाद के सभी [[पाश्चात्य दर्शन]], [[ईसाई दर्शन]] और पूर्व - [[नवजागरण काल]] विज्ञान; और काफी [[इस्लामी दर्शन]] और [[यहूदी दर्शन]] ([[अरस्तू से प्रभावित लेखकों]] की सूची देखें)}}
}}
 
[[चित्र:Aristotle.jpg|thumb|200px|अरस्तु]]
 
'''अरस्तु''' (384 ईपू – 322 ईपू) यूनानी दार्शनिक थे। वे [[प्लेटो]] के शिष्य व [[सिकंदर]] के गुरु थे। उनका जन्म [[स्टेगेरिया]] नामक नगर में हुआ था ।  अरस्तु ने [[भौतिक शास्त्र|भौतिकी]], [[आध्यात्मिकता|आध्यात्म]], [[काव्य|कविता]], [[नाटक]], [[संगीत]], [[तर्कशास्त्र]], [[राजनीति|राजनीति शास्त्र]], [[नीतिशास्त्र]], [[जीव विज्ञान]] सहित कई विषयों पर रचना की। अरस्तु ने अपने गुरु प्लेटो के कार्य को आगे बढ़ाया।
[[प्लेटो]], [[सुकरात]] और अरस्तु पश्चिमी दर्शनशास्त्र के सबसे महान दार्शनिकों में एक थे।  उन्होंने पश्चिमी [[दर्शनशास्त्र]] पर पहली व्यापक रचना की, जिसमें नीति, तर्क, विज्ञान, राजनीति और आध्यात्म का मेलजोल था।  [[भौतिक शास्त्र|भौतिक विज्ञान]] पर अरस्तु के विचार ने मध्ययुगीन शिक्षा पर व्यापक प्रभाव डाला और इसका प्रभाव [[पुनर्जागरण]] पर भी पड़ा।  अंतिम रूप से [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] के भौतिकवाद ने इसकी जगह ले लिया।
जीव विज्ञान उनके कुछ संकल्पनाओं की पुष्टि उन्नीसवीं सदी में हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.independent.co.uk/arts-entertainment/books/reviews/darwins-ghosts-by-rebecca-stott-7808310.html|title=Darwin's Ghosts, By Rebecca Stott|website=independent.co.uk|access-date=19 June 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20120605020138/http://www.independent.co.uk/arts-entertainment/books/reviews/darwins-ghosts-by-rebecca-stott-7808310.html|archive-date=5 जून 2012|url-status=live}}</ref> उनके तर्कशास्त्र आज भी प्रासांगिक हैं।  उनकी आध्यात्मिक रचनाओं ने मध्ययुग में इस्लामिक और यहूदी विचारधारा को प्रभावित किया और वे आज भी क्रिश्चियन, खासकर रोमन कैथोलिक चर्च को प्रभावित कर रही हैं।  उनके दर्शन आज भी उच्च कक्षाओं में पढ़ाये जाते हैं।
 अरस्तु ने अनेक रचनाएं की थी, जिसमें कई नष्ट हो गई। अरस्तु का राजनीति पर प्रसिद्ध ग्रंथ [[पोलिटिक्स]] है।<ref>भाषा विज्ञान, डा० [[भोलानाथ तिवारी]], किताब महल- दिल्ली, पन्द्रहवाँ संस्करण १९८१, पृष्ठ-४८१</ref>अरस्तु ने जन्तु इतिहास नामक पुस्तक लिखी।इस पुस्तक में लगभग 500 प्रकार के विविध जन्तुओं की रचना,स्वभावLogy का सम्मान प्राप्त है।
 
== जन्म ==
अरस्तु का जन्म 384-322 ई. पू. में हुआ था और वह ६२ वर्ष तक जीवित रहे। उनका जन्म स्थान स्तागिरा (स्तागिरस) नामक नगर था। उनके पिता मकदूनिया के राजा के दरबार में शाही वैद्य थे। इस प्रकार अरस्तु के जीवन पर मकदूनिया के दरबार का काफी गहरा प्रभाव पड़ा था। उनके पिता की मौत उनके बचपन में ही हो गई थी।
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