"पुद्गल" के अवतरणों में अंतर

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[[जैन दर्शन]] के अनुसार स्थूल भौतिक पदार्थ '''पुद्गल''' कहलाता है क्योंकि यह अणुओं के संयोग और वियोग का खेल है। [[बौद्धपुद्घाल दर्शन|बौद्धमें धर्मदर्शन]]स्पर्श, मेंरस, आत्मागंध, कोवर्ण पुद्गलहोते कहतेहै। हैं।ये यहउसके पाँचविशेष स्कंधों-गुण रूप,है। वेदना,जहा संस्कार,इनमें संज्ञासे औरकोई विज्ञानएक काभी ऐसागुण समूहहोगा हैवहा नियम से बाकी तीनों गुण होगे ही। जो निर्वाणरीपी कीहै दिखता है वो पुधाल है। सारी दुनिया पुद्गल के पीछे भागते हुए उसे अपना अवस्थाबनाने में विशीर्षलगी होहै जाताजब है।की वो जुड़ता (पुद) और बिछड़ता (गल) रहेगा।
 
==व्युत्पत्ति==
बेनामी उपयोगकर्ता