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'''माद्री''' राजा [[पाण्डु]] की दूसरी रानी थी। उसके बेटे [[नकुल]] और [[सहदेव]] थे।थें। माद्री पारस में मद्र राज्य की राजकुमारी एवं राजा शल्य की बहिनबहन थी। एक बार मद्र राज्य ने संकट के समय राजा पांडु से युद्ध मे सहायता की मांग की ।की। राजा पांडु ने मद्र देश की सहायता का निर्णय किया और उनकी युद्ध मे सहायता की , उनकी सहायता से मद्र देश युद्ध मे विजयी हुआ और मद्र नरेश ने अपनी पुत्री माद्री के विवाह का प्रस्ताव राजा पांडु को दिया , राजा पांडु ने माद्री को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया ।किया।
[[File:Pandu hunt kindama and his death.jpg|thumb|माद्री राजा पांडु के साथ सती होने का निर्णय लेती है।]]
उसके पश्चात मद्र नरेश ने अपनी पुत्री का विवाह पांडु से कर दिया। जब पाण्डु विश्व विजयी होकर हस्तिनापुर लौटे तो अपना राज पाट अपने ज्येष्ठ भ्राता [[धृतराष्ट्र]] को देकर, अपनी दोनों पत्नियों के संग तपस्या करने जंगल मे चले गए। वहां ऋषि किंदम के आश्रम में अतिथी बन कर निवास करने लगे। एक दिवस माद्री के हठ करने के बाद पाण्डु सिंह का शिकार करने गए। सिंह की दहार सुनकर बिना देखें ही उन्होंने शब्दभेदी बाण चला दिया। जैसे ही सिंह को तीर लगा वैसे ही घायल नर की आवाज़ निकली। इसके बाद उन्होंने देखा कि,किंदम ऋषि अपनी पत्नी के संग सहवास कर रहे थे और इसी क्रिया के अंतर्गत उनको बाण लगा था ।
उसके बाद मद्र नरेश ने अपनी पुत्री का विवाह पांडु से कर दिया
जब पाण्डु विश्व विजयी होकर हस्तिनापुर लौटे तो अपना राज पाट अपने अंधे भाई को देकर , अपनी दोनों पत्नियों के संग तपस्या करने जंगल मे चले गए
वहां ऋषि किंदम के आश्रम में मेहमान बन कर निवाश करने लगे
एक दिन माद्री के हठ करने के बाद पाण्डु सिंह का शिकार करने गए
सिंह की गर्जना सुनकर बिना देखै ही उन्होंने शब्दभेदी बाण छोड़ दिया
जैसे ही सिंह को तीर लगा वैसे ही नर की आवाज आह के रूप मे निकली , इसके बाद उन्होंने देखा कि,किंदम ऋषि अपनी पत्नी के संग सहवास कर रहे थे और इसी क्रिया के अंतर्गत उनको बाण लगा था ।
 
इसलिए उन्होंने पाण्डु को श्राप दिया कि जब भी वे अपनी पत्नी संग सहवास करेंगे तभी वो मर जाएंगेजाएंगे।
 
 
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