"विनोबा भावे": अवतरणों में अंतर

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(→‎भूदान आन्दोलन: मैंने पुराने लेखन में कोई परिवर्तन नहीं किया है बल्कि कुछ शुरुआत से लिखा है जबकि इस बारे में कुछ नहीं लिखा हुआ था पहले से किसीने को टिप्पणी नहीं कि थी तो मैने कुछ अच्छा लिखा है शायद इसको पड़ने वाले छात्र कुछ अच्छा महसूस करे नमस्कार 🙏)
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== बचपन ==
 
विनोबा के यूं तो दो छोटे भाई और भी थे, मगर मां का सर्वाधिक वात्सल्य विनायक को ही मिला। भावनात्मक स्तर पर विनोबा भी खुद को अपने पिता की अपेक्षा मां के अधिक करीब पाते थे। यही हाल रुक्मिणी बाई का था, तीनों बेटों में ‘विन्या’ उनके दिल के सर्वाधिक करीब था। वे भजन-पूजन को समर्पित रहतीं. मां के संस्कारों का प्रभाव. भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति उदासीनता और त्याग की भावना किशोरावस्थाpकिशोरावस्था में ही विनोबा के चरित्र का हिस्सा बन चुकी थी। घर का निर्जन कोना उन्हें ज्यादा सुकून देता. मौन उनके अंतर्मन को मुखर बना देता. वे घर में रहते, परिवार में सबके बीच, मगर ऐसे कि सबके साथ रहते हुए भी जैसे उनसे अलग, निस्पृह और निरपेक्ष हों. नहीं तो मां के पास, उनके सान्न्ध्यि में. ‘विन्या’ उनके दिल, उनकी आध्यात्मिक मन-रचना के अधिक करीब था। मन को कोई उलझन हो तो वही सुलझाने में मदद करता. कोई आध्यात्मिक समस्या हो तो भी विन्या ही काम आता. यहां तक कि यदि पति नरहरि भावे भी कुछ कहें तो उसमें विन्या का निर्णय ही महत्त्वपूर्ण होता था। ऐसा नहीं है कि विन्या एकदम मुक्त या नियंत्रण से परे था। परिवार की आचार संहिता विनोबा पर भी पूरी तरह लागू होती थी। बल्कि विनोबा के बचपन की एक घटना है। रुक्मिणी बाई ने बच्चों के लिए एक नियम बनाया हुआ था कि भोजन तुलसी के पौघे को पानी देने के बाद ही मिलेगा. विन्या बाहर से खेलकर घर पहुंचते, भूख से आकुल-व्याकुल. मां के पास पहुंचते ही कहते:
: ‘मां, भूख लगी है, रोटी दो.’
: ‘रोटी तैयार है, लेकिन मिलेगी तब पहले तुलसी को पानी पिलाओ.’ मां आदेश देती.
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