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| Year = १९८९
| Session = १३ वां
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सांची [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[रायसेन जिला|रायसेन जिले]], में बेतवा नदी के तट स्थित एक छोटा सा गांव है। यह [[भोपाल]] से ४६ कि॰मी॰ पूर्वोत्तर में, तथा [[बेसनगर]] और [[विदिशा]] से १० कि॰मी॰ की दूरी पर मध्य प्रदेश के मध्य भाग में स्थित है। यहां कई [[बौद्ध]] स्मारक हैं, जो तीसरी शताब्दी ई.पू. से बारहवीं शताब्दी के बीच के काल के हैं। सांची रायसेन जिले की एक नगर पंचायत है। रायसेन जिले में एक अन्य विश्व दाय स्थल, [[भीमबेटका]] भी है। विदिशा से नजदीक होने के कारण लोगों में यह भ्रम होता है की यह विदिशा जिला में है। यहाँ छोटे-बड़े अनेकों स्तूप हैं, जिनमें स्तूप संख्या २ सबसे बड़ा है। चारों ओर की हरियाली अद्भुत है। इस स्तूप को घेरे हुए कई [[तोरण]] भी बने हैं। स्तूप संख्या १ के पास कई लघु स्तूप भी हैं, उन्ही के समीप एक गुप्त कालीन पाषाण स्तंभ भी है। यह प्रेम, शांति, विश्वास और साहस के प्रतीक हैं। सांची का महान मुख्य स्तूप, मूलतः सम्राट [[अशोक]] महान ने तीसरी शती, ई.पू. में बनवाया था।<ref name="ITNN"/> इसके केन्द्र में एक अर्धगोलाकार ईंट निर्मित ढांचा था, जिसमें भगवान [[बुद्ध]] के कुछ अवशेष रखे थे। इसके शिखर पर स्मारक को दिये गये ऊंचे सम्मान का प्रतीक रूपी एक छत्र था।<ref>दहेजिया, विद्या (१९९७). ''ईण्डियन आर्ट''. फैदों: लंदन.
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'''सांची''' [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[रायसेन जिला|रायसेन जिले]], में बेतवा नदी के तट स्थित एक छोटा सा गांव है। यह [[भोपाल]] से ४६ कि॰मी॰ पूर्वोत्तर में, तथा [[बेसनगर]] और [[विदिशा]] से १० कि॰मी॰ की दूरी पर मध्य प्रदेश के मध्य भाग में स्थित है। यहां कई [[बौद्ध]] स्मारक हैं, जो तीसरी शताब्दी ई.पू. से बारहवीं शताब्दी के बीच के काल के हैं। सांची रायसेन जिले की एक नगर पंचायत है। रायसेन जिले में एक अन्य विश्व दाय स्थल, [[भीमबेटका]] भी है। विदिशा से नजदीक होने के कारण लोगों में यह भ्रम होता है की यह विदिशा जिला में है। यहाँ छोटे-बड़े अनेकों स्तूप हैं, जिनमें स्तूप संख्या २ सबसे बड़ा है। चारों ओर की हरियाली अद्भुत है। इस स्तूप को घेरे हुए कई [[तोरण]] भी बने हैं। स्तूप संख्या १ के पास कई लघु स्तूप भी हैं, उन्ही के समीप एक गुप्त कालीन पाषाण स्तंभ भी है। यह प्रेम, शांति, विश्वास और साहस के प्रतीक हैं। सांची का महान मुख्य स्तूप, मूलतः सम्राट [[अशोक]] महान ने तीसरी शती, ई.पू. में बनवाया था।<ref name="ITNN"/> इसके केन्द्र में एक अर्धगोलाकार ईंट निर्मित ढांचा था, जिसमें भगवान [[बुद्ध]] के कुछ अवशेष रखे थे। इसके शिखर पर स्मारक को दिये गये ऊंचे सम्मान का प्रतीक रूपी एक छत्र था।<ref>दहेजिया, विद्या (१९९७). ''ईण्डियन आर्ट''. फैदों: लंदन. ISBN 0-7148-3496-3.</ref>.
 
== इतिहास ==
=== शुंग काल ===
इस स्तूप में एक स्थान पर दूसरी शताब्दी ई.पू. में तोड़फोड़ की गई थी। यह घटना [[शुंग वंश|शुंग सम्राट]] [[पुष्यमित्र शुंग]] के उत्थान से जोड़कर देखी जाती है। यह माना जाता है कि पुष्यमित्र ने इस स्तूप का ध्वंस किया होगा और बाद में, उसके पुत्र [[अग्निमित्र]] ने इसे पुनर्निर्मित करवाया होगा। {{Ref_label|गाइड|क|none}}। शुंग वंश के अंतिम वर्षों में, स्तूप के मूल रूप का लगभग दुगुना विस्तार पाषाण शिलाओं से किया गया था। इसके गुम्बद को ऊपर से चपटा करके, इसके ऊपर तीन छतरियां, एक के ऊपर दूसरी करके बनवायीं गयीं थीं। ये छतरियां एक वर्गाकार मुंडेर के भीतर बनीं थीं। अपने कई मंजिलों सहित, इसके शिखर पर धर्म का प्रतीक, विधि का चक्र लगा था। यह गुम्बद एक ऊंचे गोलाकार ढोल रूपी निर्माण के ऊपर लगा था। इसके ऊपर एक दो-मंजिला जीने से पहुंचा जा सकता था। भूमि स्तर पर बना दूसरी पाषाण परिक्रमा, एक घेरे से घिरी थी। इसके बीच प्रधान दिशाओं की ओर कई तोरण बने थे। द्वितीय और तृतीय स्तूप की इमारतें शुंग काल में निर्मित प्रतीत होतीं हैं, परन्तु वहां मिले शिलालेख अनुसार उच्च स्तर के अलंकृत तोरण शुंग काल के नहीं थे, इन्हें बाद के सातवाहन वंश द्वारा बनवाया गया था। इसके साथ ही भूमि स्तर की पाषाण परिक्रमा और महान स्तूप की पाषाण आधारशिला भी उसी काल का निर्माण हैं।jjguuuहैं।
 
=== सातवाहन काल ===
 
=== पाश्चात्य पुनरान्वेषण ===
एक ब्रिटिश अधिकारी जनरल टेलर पहले ज्ञात इतिहासकार थे, इन्होंने सन [[१८१८]] में, सांची के स्तूप का अस्तित्व दर्ज किया।<ref name="IGNCA">{{हिन्दी चिह्न}}[http://tdil.mit.gov.in/coilnet/ignca/mw046.htm इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060115093822/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mw046.htm |date=15 जनवरी 2006 }} के जालस्थल पर</ref> अव्यवसायी पुरातत्ववेत्ताओं और खजाने के शिकारियों ने इस स्थल को खूब ध्वंस किया, जब तक कि सन [[१८१८]] में उचित जीर्णोद्धार कार्य नहीं आरम्भ हुआ। [[१९१२]] से [[१९१९]] के बीच, ढांचे को वर्तमान स्थिति में लाया गया। यह सब जॉन मार्शल की देखरेख में हुआ।<ref>{{Cite web |url=[http://projectsouthasia.sdstate.edu/docs/archaeology/primarydocs/Sanchi/HistArt.htm |title=जॉन मार्शल, "An Historical and Artistic Description of Sanchi", from ''ए गाइड टू सांची,'' कलकत्ता: सुपरिन्टेन्डेंट, गवर्नमेंट प्रिंटिंग (१९१८). पृष्ठ ७-२९ on line, Project South Asia. |access-date=16 मार्च 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090210033559/http://projectsouthasia.sdstate.edu/docs/archaeology/primarydocs/Sanchi/HistArt.htm |archive-date=10 फ़रवरी 2009 |url-status=dead }}]</ref> आज लगभग पचास स्मारक स्थल सांची के टीले पर ज्ञात हैं, जिनमें तीन स्तूप और कई मंदिर भी हैं। यह स्मारक [[१९८९]] में [[यूनेस्को]] द्वारा [[विश्व धरोहर स्थल]] घोषित हुआ है।
 
== भूगोल एवं जनसांख्यिकी ==
सांची की भौगोलिक अवस्थिति 23.48° उत्तर अक्षांश एवं 77.73° पूर्व देशान्तर पर है।<ref>{{Cite web |url=[http://www.fallingrain.com/world/IN/35/Sanchi.html |title=फॉलिंग रेन जीनोमिक्स, इंक - सांची |access-date=16 मार्च 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080213120403/http://www.fallingrain.com/world/IN/35/Sanchi.html |archive-date=13 फ़रवरी 2008 |url-status=dead }}]</ref> इसकी समुद्रतल से औसत ऊंचाई ४३४&nbsp; [[मीटर]] है। [[उदयगिरि]] से साँची पास ही है। यहाँ बौद्ध स्तूप हैं, जिनमें एक की ऊँचाई ४२ फीट है। साँची स्तूपों की कला प्रख्यात है। साँची से ५ मील सोनारी के पास ८ बौद्ध स्तूप हैं और साँची से ७ मील पर भोजपुर के पास ३७ बौद्ध स्तूप हैं। साँची में पहले बौद्ध विहार भी थे। यहाँ एक सरोवर है, जिसकी सीढ़ियाँ बुद्ध के समय की कही जाती हैं।<ref>{{हिन्दी चिह्न}}{{cite web |url= http://hindi.webduniya.com/religion/religion/buddhism/0905/07/1090507114_3.htm|title= बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल |access-date= जून १४ २००९ |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= एच टी एम एल|work= |publisher= वेब दुनिया|pages= ०३|language= हिन्दी|archiveurl= https://web.archive.org/web/20140514071049/http://hindi.webduniya.com/religion/religion/buddhism/0905/07/1090507114_3.htm|archivedate= 14 मई 2014|quote= |url-status= dead}}</ref>
 
२००१ की जनगणना<ref>{{GR|India}}</ref> के अनुसार सांची की जनसंख्या ६७८५ है। पुरुष यहां का ५३% और स्त्रियां ४७% भाग हैं। यहां की औसत साक्षरता दर ६७% है, जो कि राष्ट्रीय दर ५९.५% से कहीं अधिक है। पुरुष साक्षरता ७५% और स्त्री साक्षरता ५७% है। यहां की १६% जनता छः वर्ष से कम की है।
== चित्र दीर्घा ==
<gallery class="center" widths="160px" heights="120px" mode="packed-hover">
चित्रFile:The Great Stupa at SanchiThe_Great_Stupa_at_Sanchi.jpg|मुख्य स्तूप सांची
चित्रFile:Stupa no. 3, Sanchi.jpg|स्तूप सं.३
चित्रImage:Sanchi2.jpg|सांची, २००३
चित्रFile:Northern Gate, Sanchi Stupa built in 3rd century BC.jpg|उत्तरी द्वार, तृतीय शती में निर्मित
चित्रFile:Stupa of Buddha's Disciple, Sanchi.jpg|बौद्ध भिक्षुओं का स्तूप, सांची
चित्रFile:Sanchi3.jpg|सांची के महान स्तूप का रूपांकन
चित्रFile:Sanchi Stupa distant view.jpg|सांची स्तूप, पुनरोद्धार के बाद, उद्यानों सहित, २००९
चित्रFile:A buddhist monastery at Sanchi.jpg|सांची में एक बौद्ध मठ
चित्रFile:Monks visiting the Sanchi Stupa.jpg|सांची स्तूप में दर्शनार्थी भिक्षु
चित्रFile:Sanchi Stupa No.2 Front view1.jpg
चित्रFile:Great Sanchi Stupa Gallery (3).jpg
चित्रFile:Great Sanchi Stup masonry work.jpg
चित्रFile:Ashoka’s Pillar at Sanchi Stup (2).jpg
चित्रFile:Sanchi Stupa TORANAS Entry Gate3.jpg
चित्रFile:Sanchi Stupa 'TORANAS' The Entry Gate4.jpg
चित्रFile:Great Sanchi Stupa Side view.jpg
चित्रFile:Great Sanchi Stupa Gallery (1).jpg
</gallery>
<small><center>चित्र का ब्यौरा देखने हेतु माउस को चित्र के ऊपर लायें।</center></small>
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
[https://web.archive.org/web/20120131195955/http://www.jagranyatra.com/2010/04/buddha-art/ सांची: बौद्ध कला की बेमिसाल कृतियां]
* [https://web.archive.org/web/20060115093822/http://tdil.mit.gov.in/CoilNetcoilnet/IGNCAignca/mw046.htm साँची] इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के जालस्थल पर
* [http://www.insighttvnews.com/go.php?show=newsdetails&id=11291 प्राचीनकालीन बौद्ध शिक्षा का केंद्र - साँची] इनसाइट टीवी जालस्थल पर
* [https://web.archive.org/web/20070927003357/http://www.bergerfoundation.ch/wat4/museum1?museum=Sanchi&col=pays&country=Inde&genre=%&cd=7256-3191-2328:7256-3191-2325:7256-3191-2326&cdindex=2"सांची (मध्य प्रदेश)", जैकिस-एदुआर्दो बर्जर फाउण्डेशन, वर्ल्ड आर्ट ट्रेज़र्स]
* [https://web.archive.org/web/20160305123015/http://moomalyatra.blogspot.com/2009/03/blog-post.html सांची के स्तूप - पास आकर देखने की चीज]
 
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