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=== कर्ण और शल्य वध ===
[[चित्र:Arjunakaranbattle.jpg|left|thumb|175px|कर्ण और अर्जुन का युद्ध]]'''[[द्रोण|द्रोण वध]]''' के पश्चात [[कर्ण]] कौरव सेना का कर्णधार हुआ। [[कर्ण]] और [[अर्जुन]] में भाँति-भाँति के [[अस्त्रशस्त्र|अस्त्र-शस्त्रों]] से युक्त महाभयानक युद्ध हुआ, जो देवासुर-संग्राम को भी मात करने वाला था। [[कर्ण]] और [[अर्जुन]] के संग्राम में [[कर्ण]] ने अपने बाणों से शत्रु-पक्ष के बहुत-से वीरों का संहार कर डाला। यद्यपि युद्ध गतिरोधपूर्ण हो रहा था लेकिन [[कर्ण]] तब उलझ गया जब उसके रथ का एक पहिया धरती में धँस गया। गुरु [[परशुराम]] के शाप के कारण वह अपने को [[दिव्यास्त्र|दैवीय अस्त्रों]] के प्रयोग में भी असमर्थ पाकर रथ के पहिए को निकालने के लिए नीचे उतरता है। तब [[श्रीकृष्ण]], [[अर्जुन]] को उसके द्वारा किये [[अभिमन्यु (अर्जुनपुत्र)|अभिमन्यु]] वध, [[कुरु]] सभा में [[द्रोपदी]] को वेश्या और उसकी [[कर्ण]] वध करने की प्रतिज्ञा याद दिलाकर उसे मारने को कहते है, तब [[अर्जुन]] ने [[अंजलिका अस्त्रअंजलिकास्त्र]] से [[कर्ण]] का सिर धड़ से अलग कर दिया। तदनन्तर राजा [[शल्य]] कौरव-सेना के सेनापति हुए, किंतु वे युद्ध में आधे दिन तक ही टिक सके। दोपहर होते-होते राजा [[युधिष्ठिर]] ने उन्हें मार दिया।
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