"फ़रवहर" के अवतरणों में अंतर

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== चिह्न की उत्पत्ति ==
पर-युक्त चक्र या पर-युक्त सूर्य का चिह्न [[मध्य पूर्व]] के क्षेत्र में प्राचीनकाल से प्रयोग होता आया है। यह [[कांस्य युग]] की मोहरों में भी देखा जा सकता है। कुछ समय बाद इस चक्र के अन्दर एक मनुष्य की आकृति भी डाली जाने लगी थी। [[असीरिया|असीरियाई लोगों]] के लिए यह उनके अशूर (<small>ܐܫܘܪ, Ashur</small>) नामक देवता का रूपांकन था। यह फ़रवहर के चिह्न का स्रोत होने के बावजूद यह ज्ञात नहीं है कि जिन ईरानी विद्वानों ने इस चिह्न का प्रयोग पारसी धर्मपंथ में आरम्भ किया। वे इस चिह्न के साथ क्या मतलब जोड़ते थे। इतना ज़रूर है कि ईरान में इसे सबसे पहले शाही शिलालेखों में देखा गया इसलिए शायद यह 'ख़्वारनाह​' का प्रतीक रहा हो। 'ख़्वारनाह​' (<small>khvarenah</small>) शब्द का मतलब पारसी धर्म-ग्रंथों में 'सम्राट की दिव्य महानता' निकलता है, यानि वह दिव्य महानता जो किसी शासक या सम्राट के साथ जुड़कर उसकी सहायता करे। संभव है कि फ़रवहर इन शिलालेखों में सम्राट की फ़्रवशी दर्शा रहा हो।<ref name="ref10pavid">[http://books.google.com/books?id=4dY0hHqQ4lgC Omnibus IV: The Ancient World], Veith, Wilson, Fischer, Veritas Press, 2009, ISBN 978-1-932168-86-0, ''... In a Persian version of the emperor cult, the faravahar symbolized the winged sun in Zoroastrianism and also the divine authority of the king ...''</ref>
 
== इन्हें भी देखें ==
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