"इस्लाम" के अवतरणों में अंतर

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इस्लाम के दो महत्वपूर्ण [[इस्लामी त्यौहार|त्यौहार]] [[ईद|ईद उल फितर]] और [[ईद-उल-अज़हा|ईद-उल-अज़्हा]] हैं। रमज़ान का महीना (जो कि [[हिजरी|इस्लामी कैलेण्डर]] का नवाँ महीना होता है) बहुत पवित्र समझा जाता है। अपनी इस्लामी पहचान दिखाने के लिये मुसलमान अपने बच्चों का नाम अक्सर अरबी भाषा से लेते हैं। इसी कारण वह दाढ़ी भी रखते हैं। इस्लाम में कपड़े पहनते समय लज्जा रखने पर बहुत ज़ोर दिया गया है। इसलिये अधिकतर स्त्रियाँ बुर्का पहनती हैं और कुछ स्त्रियाँ नकाब भी पहनती हैं।
 
== अन्य धर्मपंथ ==
{{मुख्य|इस्लाम एवं अन्य धर्मपंथ }}
 
[[चित्र:Sufi photos 051.jpg|250px|thumb|भारत के अजमेर शहर में सूफी संत मोइनुदीन चिश्ती की दरगाह। यहां रोज़ हज़ारों लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं
।]]
अन्य धर्मोंपंथ से इस्लाम का संपर्क समय और परिस्थितियों से प्रभावित रहा है। यह संपर्क मुहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय से ही शुरु हो गया था। उस समय इस्लाम के अलावा अरब में ३ परम्पराओं के मानने वाले थे। एक तो अरब का पुराना धर्म (जो अब लुप्त हो चुका है) था जिसकी वैधता इस्लाम ने नहीं स्वीकार की। इसका कारण था कि वह धर्म ईश्वर की एकता को नहीं मानता था जो कि इस्लाम के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध था। [[ईसाई धर्म|ईसाई पंथ]] और [[यहूदी धर्म|यहूदी पंथ]] को इस्लाम ने वैध तो स्वीकार कर लिया पर इस्लाम के अनुसार इन धर्मोंमजहब के अनुयायीयों और पुजारियों ने इनमें बदलाव कर दिये थे। मुहम्म्द सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने मक्का से मदीना पहुंचने के बाद वहाँ के यहूदियों के साथ एक संधि करी जिसमें यहूदियों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को स्वीकारा गया।<ref>Jacob Neusner, ''God's Rule: The Politics of World Religions'', p. 153, Georgetown University Press, 2003, ISBN 0-87840-910-6</ref> अरब बहुदेववादियों के साथ भी एक संधि हूई जिसे हुदैबा की सुलह कहते हैं।
 
जिहाद :
73

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