"लोच" के अवतरणों में अंतर

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[[अर्थशास्त्र]] के सन्दर्भ में, '''लोच''' (elasticity) शब्द का उपयोग किसी आर्थिक चर को बदलने पर किसी दूसरे चर में हुए परिवर्तन की मात्रा बताने के लिये किया जाता है। यदि एक चर के परिवर्तन से दूसरा चर अधिक परिवर्तित होता है तो कहते हैं कि लोच अधिक है। उदाहरण के लिये, यदि किसी उत्पाद के मूल्य में कमी की जाय तो उसकी बिक्री कितनी बढ़ेगी, इसके लिये 'लोच' शब्द का प्रयोग किया जाता है। कीमत बढ़ने पर गिफीन वस्तु की मांग बढ़ती हैं व कम होनें पर कुछ घटती हैं । जैसें - यदि शुद्ध घी की कीमत बढ़ जाएं व आय परिवर्तित ना हों तो उपभोक्ता वनस्पति की ओर प्रतिस्थापन कर देता हैं व तत्पश्चात यदि आय में वृद्धि होती हैं तो वह वनस्पति घी में कुछ कमी कर के कुछ मात्रा शुद्ध घी की लेता हैं अत: तब वनस्पति घी एक तरह से गिफीन वस्तु होती हैं
 
==माँग की लोच==
 
 
मूल्य में परिवर्तन के परिणामस्वरूप माँग में जिस गति से परिवर्तन होता है उसे माँग की लोच कहते हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है की मूल्य में परिवर्तन के फलस्वरूप माँग में परिवर्तन की प्रवृत्ति को माँग की लोच कहते हैं।